गोपालगंज में ₹37 करोड़ की लागत से बना मॉडल सदर अस्पताल खुद बीमार, बंद पड़ा है ऑटोमेटिक AC,उमस से तड़प रहे मरीज

Gopalganj News: गोपालगंज जिला मुख्यालय में ₹37 करोड़ की लागत से बना मॉडल सदर अस्पताल इन दिनों तकनीकी खामियों और अव्यवस्था का केंद्र बन गया है. भीषण गर्मी के बीच अस्पताल का फुली ऑटोमेटिक एसी और सैनिटाइजेशन सिस्टम बंद पड़ा है, जिससे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज हाथ के पंखों के सहारे रहने को मजबूर हैं. अस्पताल प्रबंधक जान महम्मद ने खुलासा किया है कि भवन निर्माण के दौरान आउटर चैंबर न बनाए जाने के कारण ऑटोमेटिक कूलिंग और सैनिटाइजेशन प्लांट स्थापित नहीं हो सका है और वर्तमान में काम कामचलाऊ व्यवस्था के भरोसे है.

Gopalganj News(मनीष राज): जिला मुख्यालय में करीब 37 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया अत्याधुनिक मॉडल सदर अस्पताल इन दिनों सफेद हाथी साबित हो रहा है. बाहर से शीशे की तरह चमकने वाले इस आधुनिक अस्पताल के भीतर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. जिले में जारी भीषण गर्मी और उमस के बीच अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में न तो एसी (Air Conditioner) काम कर रहा है और न ही संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त सैनिटाइजेशन की व्यवस्था है. करोड़ों की बिल्डिंग होने के बावजूद मरीज और उनके परिजन हाथ के पंखों के सहारे इस चुभती गर्मी को काटने को मजबूर हैं.

गर्मी से दम तोड़ रही हैं आधुनिक सुविधाएं, मरीजों ने बयां किया दर्द

अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस तथाकथित मॉडल अस्पताल में ऐसी बदइंतजामी समझ से परे है. बरौली निवासी मरीज जमीला खातून ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं. वार्ड में इतनी भीषण गर्मी और उमस है कि सांस लेना भी दूभर हो रहा है. छत के पंखे सिर्फ गर्म हवा फेंक रहे हैं, जिसके कारण उन्हें हाथ के पंखे का सहारा लेना पड़ रहा है. वहीं थावे थाना क्षेत्र से आईं माया देवी ने कहा कि अस्पताल का नया और भव्य भवन देखकर उन्हें बेहतर इलाज और सुविधाओं की उम्मीद थी. लेकिन यहाँ वार्ड का माहौल इतना असहज है कि गर्मी के कारण उनकी तबीयत सुधरने के बजाय और अधिक बिगड़ रही है. जादोपुर के हरिहरपुर गांव निवासी कमलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके परिजन अस्पताल में भर्ती हैं और दिनभर उमस से परेशान रहते हैं. यदि इतनी बड़ी और महंगी बिल्डिंग में ठंडक की बुनियादी व्यवस्था भी न हो, तो इसे आधुनिक अस्पताल कहने का कोई मतलब नहीं रह जाता.

गंदगी और सैनिटाइजेशन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, संक्रमण का खतरा

अस्पताल में सिर्फ कूलिंग सिस्टम ही फेल नहीं है, बल्कि साफ-सफाई और संक्रमण मुक्त वातावरण का दावा भी खोखला साबित हो रहा है.

बरौली की संगीता देवी सहित कई अन्य तीमारदारों ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त पंखे तक नहीं हैं और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था भी पूरी तरह रामभरोसे है. चिलचिलाती गर्मी और वार्डों में पसरी गंदगी के कारण भर्ती मरीजों में अन्य गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा चौबीसों घंटे बना हुआ है.  स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार ने दिखावे के लिए आधुनिक अस्पताल तो खड़ा कर दिया, लेकिन लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है.

अस्पताल प्रबंधक का हैरान करने वाला खुलासा: भवन निर्माण में हुई तकनीकी अनदेखी

इस पूरे मामले और अव्यवस्था पर जब सदर अस्पताल के प्रबंधक से बात की गई, तो भवन निर्माण विभाग की एक बड़ी लापरवाही और तकनीकी खामी का खुलासा हुआ. प्रबंधक जान महम्मद का कहना है कि सदर अस्पताल के इस नए भवन निर्माण के दौरान कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की अनदेखी की गई है. अस्पताल में सैनिटाइजेशन प्लांट लगाने के लिए जो आवश्यक आउटर चैंबर बनना चाहिए था, उसका निर्माण ही नहीं किया गया. यही मुख्य कारण है कि अस्पताल का फुली ऑटोमेटिक एसी (Automatic AC) और सैनिटाइजेशन सिस्टम स्थापित नहीं हो सका है. फिलहाल हम लोग अस्थायी व्यवस्था के सहारे जैसे-तैसे काम चला रहे हैं, जो कि इस मौसम में पर्याप्त नहीं है. समस्या के स्थाई समाधान के लिए संबंधित उच्च विभाग को लिखित में अवगत करा दिया गया है.

इस तकनीकी लापरवाही के सामने आने के बाद अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना पूरी तैयारी और जांच-परख के ₹37 करोड़ की इस अधूरी योजना का आनन-फानन में उद्घाटन क्यों कर दिया गया, जिसका खामियाजा आज गरीब मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

Aditya Kumar Ravi is a contributor at Prabhat Khabar.

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