Gopalganj News: (प्रशांत पाठक) बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और सरकारी स्कूलों को कॉन्वेंट की तर्ज पर विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें ‘पीएम श्री’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही हैं.
सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं.लेकिन धरातल पर स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है. प्रखंड के छोटका सांखे गांव स्थित पीएम श्री प्लस टू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सांखे रामदास इसका जीवंत उदाहरण है.
18 सौ छात्र-छात्राएं भय और आतंक के बीच
यहां पढ़ने वाले 18 सौ छात्र छात्राओं का पुरा दिन भय और आतंक के बिच गुजर रहा है. खास कर स्कूल में पढ़ने वाली छठवीं से 12 वीं तक पढ़ने वाली छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित हैं. वही स्कूल में पढ़ाने वाले महिला शिक्षिकाएं भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं.
सबसे बड़ी समस्या स्कूल की चारदीवारी का न होना है.जिसने न केवल स्कूल की संपत्ति को खतरे में डाल दिया है, बल्कि यहाँ पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
सड़क पर स्कूल और मंडराता खतरा
यह विद्यालय हरपुर-श्यामपुर मुख्य सड़क के बिल्कुल समीप स्थित है.सांखे गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क स्कूल के ठीक बगल से गुजरती है. चारदीवारी न होने के कारण सड़क पर दौड़ते वाहनों का शोर सीधे क्लासरूम तक पहुँचता है, जिससे छात्र-छात्राओं की एकाग्रता भंग होती है. लेकिन शोर से कहीं बड़ी समस्या असुरक्षा की है.
स्कूल परिसर खुला होने के कारण सड़क पर चलने वाले राहगीर, आवारा पशु और असामाजिक तत्व बेरोकटोक स्कूल के भीतर तक आ जाते हैं. स्थिति यह है कि छुट्टी के बाद ही नहीं, बल्कि स्कूल की अवधि के दौरान भी बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बना रहता है.
मनचले और असामाजिक तत्व स्कूल परिसर के आसपास जमावड़ा लगाए रहते है
विद्यालय में कक्षा 6 से लेकर 12 वीं तक की छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं. किशोर अवस्था की इन छात्राओं के लिए स्कूल परिसर में खुद को सुरक्षित महसूस करना एक बड़ी चुनौती बन गया है.छात्राओं का कहना है कि बाउंड्री नहीं होने के कारण सड़क छाप मनचले और असामाजिक तत्व स्कूल परिसर के आसपास जमावड़ा लगाए रहते हैं.
कोई भी बाइक से अंदर आ जाता है. वहीं दोपहर होते ही पुरा स्कूल परिसर चारागाह बन जाता है.स्कूल के आस में के पालतू पशुओं के साथ साथ आवारा जानवर भी स्कूल में पहुंच जाते हैं.
विद्यालय की सिर्फ छात्राएं ही नहीं, बल्कि स्कूल में कार्यरत महिला शिक्षिकाएं भी इस अव्यवस्था से खासी परेशान हैं.
सरकार की महिला सशक्तिकरण की खुली पोल
एक तरफ सरकार महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुरक्षा के अभाव में बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं.
स्कूल में वर्ग 6 से 12 वीं तक छात्रों की संख्या 353
वर्ग 6 से 12 वीं तक छात्राओं की संख्या 465
महिला शिक्षिकाएं 8
प्राचार्य और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने क्या बताया?
विद्यालय की बाउंड्री और सुरक्षा को लेकर विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखा गया है. स्थानीय जन प्रतिनिधियों से भी आग्रह किया गया है. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
