Gopalganj News: (संजय कुमार अभय ) गोपालगंज जिले के मांझा थाना की एक कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है. आर्केस्ट्रा संचालन के मामले में दर्ज कांड में पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठे हैं. आरोप है कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान दो महिला संचालिकाओं को गिरफ्तार दिखाया, लेकिन बाद में उनमें से एक महिला पुलिस अभिरक्षा से गायब हो गई. इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर एफआईआर में संशोधन कर एक ही महिला को दो अलग-अलग नामों से दर्शा दिया.
मामला तब सामने आया जब गिरफ्तार महिला की जमानत याचिका पर जिला जज-6 पंकज कुमार वर्मा की विशेष पॉक्सो अदालत में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आपत्तियां उठाईं, जिसके बाद कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से जवाब-तलब किया है.
23 अप्रैल की छापेमारी के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, 23 अप्रैल को मांझा थाना क्षेत्र के नई बाजार स्थित एक आर्केस्ट्रा एवं म्यूजिकल ग्रुप पर पुलिस ने छापेमारी की थी. कार्रवाई के दौरान पांच नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया था और दो महिला संचालिकाओं को गिरफ्तार किया गया था.
पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी और एसपी कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पश्चिम बंगाल की रहने वाली रानी बैरागी उर्फ रानी कुमारी तथा परोमा उर्फ प्रोभाती को गिरफ्तार दिखाया गया था. दोनों को मामले में अभियुक्त बनाया गया था.
गायब हुई दूसरी संचालिका, बदल दी गई एफआईआर
बचाव पक्ष का आरोप है कि गिरफ्तार की गई दूसरी महिला संचालिका परोमा उर्फ प्रोभाती बाद में पुलिस अभिरक्षा से गायब हो गई. इसके बाद उसकी तलाश करने के बजाय पुलिस ने एफआईआर में बदलाव कर रानी बैरागी उर्फ रानी कुमारी के नाम के साथ ‘उर्फ प्रोभाती’ जोड़ दिया.
यानी जिस महिला को पहले अलग अभियुक्त बताया गया था, बाद में उसी नाम को दूसरी महिला के साथ जोड़कर मामला प्रस्तुत कर दिया गया.
कोर्ट ने पूछा- जब दो गिरफ्तार थीं तो दूसरी कहां गई?
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने अदालत के समक्ष पुलिस रिकॉर्ड, एफआईआर और प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब पुलिस ने दो महिलाओं की गिरफ्तारी दिखाई थी तो दूसरी महिला कहां चली गई.
उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पुलिस से स्पष्ट जवाब मांगा है कि वास्तविक स्थिति क्या है। अदालत ने कहा कि यदि दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था तो दूसरी महिला का रिकॉर्ड और स्थिति स्पष्ट की जाए.
पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं पर भी अदालत की आपत्ति
मामले में दर्ज विभिन्न धाराओं पर भी अदालत ने सवाल उठाए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं, पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था.
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि कई गंभीर धाराओं के समर्थन में पुलिस पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने पूछा कि यदि अश्लील सामग्री का आरोप है तो संबंधित वीडियो या अन्य प्रमाण कहां हैं। देह व्यापार से जुड़े आरोपों के समर्थन में भी कोई आपत्तिजनक सामग्री या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया.
अदालत ने दी जमानत
मामले में प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने गिरफ्तार महिला को जमानत दे दी। साथ ही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले का स्पष्टीकरण मांगा है.
एसपी की प्रेस विज्ञप्ति में भी दो महिलाओं की गिरफ्तारी का उल्लेख
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में भी दो महिला संचालिकाओं की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया था. यही दस्तावेज अदालत में बहस के दौरान प्रमुख आधार बना.
जांच के बाद होगी कार्रवाई : एसडीपीओ
मामले को लेकर जब सिधवलिया एसडीपीओ राजेश कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा, गलत करने वाला कोई भी हो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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