भू-माफिया गंग दयाल यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज, 42 करोड़ की संपत्ति होगी जब्त, ED और EOU को भेजी गई रिपोर्ट

Gopalganj News: गोपालगंज के भू-माफिया गंग दयाल यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर 42 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ED और EOU को रिपोर्ट भेजी गई है, जबकि उसके खिलाफ दर्ज मामलों में स्पीडी ट्रायल की तैयारी भी चल रही है.

Gopalganj News (सत्येंद्र पांडेय की रिपोर्ट): गोपालगंज पुलिस ने भू-माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक चोट करने की तैयारी पूरी कर ली है. कुख्यात भू-माफिया गंग दयाल यादव द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई 42 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को जब्त करने के लिए पुलिस ने अपनी कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली है. इस कार्रवाई के दायरे में गंग दयाल यादव के अलावा पांच और भू-माफिया शामिल हैं, जिनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी. पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से जिले के भू-माफियाओं और जमीन तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है.

ईडी और आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी गई रिपोर्ट

गोपालगंज के पुलिस कप्तान (एसपी) विनय तिवारी ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने करीब 58 दिनों तक चली सघन जांच के बाद गंग दयाल यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है. इसके साथ ही उसकी और पांच अन्य भू-माफियाओं की संपत्ति जब्त करने के लिए विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय, सक्षम न्यायालय, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी गई है. अब बहुत जल्द इन सभी की अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू होगी.

पटना तक जुड़े हैं तार

जांच में यह बात सामने आई है कि गंग दयाल यादव को गहरा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके रसूख और बाहुबल के दम पर यह गिरोह सीधे-साधे और कमजोर लोगों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने का काम करता था. गंग दयाल यादव का नेटवर्क सिर्फ गोपालगंज तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार राजधानी पटना सहित अन्य जिलों से भी जुड़े हुए थे. पुलिस ने गहन जांच के दौरान उन सफेदपोशों और मददगारों की भी पहचान कर ली है, जो इस गिरोह को पर्दे के पीछे से संरक्षण और सहयोग दे रहे थे.

सभी 11 मामलों में चलेगा स्पीडी ट्रायल

भू-माफिया गंग दयाल यादव पिछले 5 अप्रैल से गोपालगंज जेल में बंद है. नगर थाने में उसके खिलाफ अब तक कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं. एसपी विनय तिवारी ने इन सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा की है और आरोपियों को जल्द से जल्द कानूनन सजा दिलाने के लिए कोर्ट में स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) शुरू करने का आदेश जारी किया है. एसपी ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों की जान-माल और जमीन की सुरक्षा के लिए संगठित अपराध के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा.

केस वापस कराने का किया था प्रयास

गंग दयाल यादव के दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने हजियापुर रोड में पूर्व सांसद अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव के आवास के पास बनी पीपीसी सड़क को जेसीबी लगवाकर उखड़वा दिया था. उसने उस सरकारी सड़क को अपनी निजी जमीन बताकर तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) से अपने पक्ष में रिपोर्ट भी तैयार करवा ली थी. इस पर नगर परिषद ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्य सफाई जमादार धर्मेंद्र सिंह के माध्यम से नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसके बाद गंग दयाल ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सिंह को केस वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया. हालांकि, जब सीजेएम कोर्ट में सुलह का आवेदन दिया गया, तो अदालत ने इसे खारिज करते हुए नगर परिषद को कड़ी फटकार लगाई और तलब कर लिया. कोर्ट का यह कड़ा रुख देखकर गंग दयाल वहां से खिसक गया था.

मकान कब्जाने की कोशिश के दौरान हुई थी गिरफ्तारी

गंग दयाल यादव की गिरफ्तारी बंजारी इलाके में एक मकान और कीमती जमीन को कब्जा करने के प्रयास के दौरान हुई थी. वह उचकागांव थाने के नरकटिया गांव के रहने वाले स्वर्गीय सूचित सिंह के पुत्र शैलेंद्र कुमार सिंह के शहर स्थित बंजारी (NH-27 के दक्षिण) के मकान और जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठा था. वह लगातार पीड़ित परिवार पर मकान और जमीन को उसके नाम पर लिख देने का दबाव बना रहा था. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने डीएसपी (परिवीक्ष्यमान) नीरव कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया था. इस स्पेशल टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती 5 अप्रैल को गंग दयाल यादव को धर दबोचा था.

गंग दयाल यादव का रहा है आपराधिक इतिहास

भू-माफिया गंग दयाल यादव का पुराना और लंबा आपराधिक इतिहास रहा है. उसके खिलाफ नगर थाने में कुल 11 मामले दर्ज हैं, जिनमें सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट करने, जानलेवा हमला करने, रंगदारी मांगने, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. इसके अलावा उस पर आर्म्स एक्ट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के तहत भी मुकदमे दर्ज हैं. इन सभी मामलों की समीक्षा कर पुलिस अब स्पीडी ट्रायल के जरिए उसे जल्द से सख्त सजा दिलाने की कार्रवाई में जुटी है.

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Published by: Vikas Jha

विकाश झा प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में छह वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है.

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