Gopalganj News: (अखिल कुमार) केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा गांवों और शहरों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के उद्देश्य से “स्वच्छ भारत मिशन” तथा “लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान” जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इन योजनाओं के तहत गांवों की गलियों, सड़कों एवं नालियों की नियमित सफाई कर लोगों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था. इसके लिए पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, सफाई कर्मियों की नियुक्ति की गई तथा घर-घर से कचरा संग्रह करने के लिए ठेला एवं वाहन की व्यवस्था भी की गई.
लेकिन मांझा प्रखंड की अधिकांश पंचायतों में यह व्यवस्था अब दम तोड़ती नजर आ रही है. कचरा उठाव की व्यवस्था ठप होने से लोग घर का कचरा सड़कों के किनारे, खाली जगहों और नालियों में फेंकने को मजबूर हो गए हैं. इससे गांवों की सूरत बिगड़ रही है और गंदगी के कारण लोगों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
शुरुआत में बेहतर थी सफाई व्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में सफाई व्यवस्था काफी बेहतर थी. सुबह-सुबह सफाई कर्मी ठेला लेकर गांवों में पहुंचते थे तथा सीटी बजाकर लोगों को कचरा देने के लिए जागरूक करते थे. लोग भी अपने घरों से कचरा निकालकर ठेले में डालते थे. इससे गांव की गलियां साफ-सुथरी रहती थीं और सड़कों पर गंदगी नहीं दिखाई देती थी.
लेकिन पिछले कुछ महीनों से यह व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. अब न तो गांव में प्रतिदिन ठेला पहुंचता है और न ही कोई सफाई कर्मी दिखाई देता है. कई पंचायतों में तो सप्ताह में एक-दो बार भी कचरा उठाव नहीं हो पा रहा है.
सड़क किनारे लग रहे कचरे के ढेर
कचरा उठाव की व्यवस्था ठप होने के कारण लोगों ने गांव के बाहर, सड़क किनारे तथा खाली पड़े स्थानों पर कचरा फेंकना शुरू कर दिया है. प्लास्टिक, घरेलू कचरा, सड़ा-गला भोजन तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थों के ढेर लगने से वातावरण दूषित हो रहा है.
सड़क किनारे फैली गंदगी से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है. वहीं दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि गंदगी बढ़ने से मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे डेंगू, मलेरिया एवं अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.
गीला-सूखा कचरा अलग करने की योजना भी फेल
सरकार द्वारा कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के लिए गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग रखने का प्रावधान भी किया गया था. पंचायतों में भेजे गए कचरा वाहन एवं ठेलों पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डालने के लिए विशेष बॉक्स बनाए गए थे.
लोगों को जागरूक करने के लिए कई बार अभियान चलाया गया तथा बताया गया कि रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा गीले कचरे में तथा प्लास्टिक, कागज एवं अन्य सामग्री सूखे कचरे में डालनी चाहिए. इससे कचरे से खाद एवं अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.
लेकिन जागरूकता की कमी और नियमित निगरानी नहीं होने के कारण यह व्यवस्था सफल नहीं हो सकी. अधिकांश लोग अब भी सारा कचरा एक साथ फेंक देते हैं.
निगरानी नहीं होने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों में सफाई व्यवस्था की निगरानी सही तरीके से नहीं हो रही है. कई जगहों पर सफाई कर्मी समय पर काम नहीं कर रहे हैं, जबकि कुछ पंचायतों में कचरा उठाव वाहन खराब पड़े हैं. इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है.
लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से घर-घर कचरा उठाव शुरू कर दिया जाए तो गांवों में फैली गंदगी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है.
कागजों तक सिमट गया स्वच्छता अभियान
स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में दीवार लेखन, रैली एवं जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए थे. स्कूलों में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया गया तथा लोगों को खुले में कचरा नहीं फेंकने की सलाह दी गई थी.
लेकिन अब यह अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है. गांवों में पहले बजने वाला स्वच्छता संदेश गीत भी बंद हो चुका है. इससे लोगों में जागरूकता का स्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है.
बरसात में बढ़ सकती है परेशानी
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. बरसात के मौसम में सड़क किनारे जमा कचरा नालियों को जाम कर देगा, जिससे जलजमाव की समस्या बढ़ेगी. साथ ही गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा.
ग्रामीणों ने की नियमित कचरा उठाव की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं पंचायत प्रतिनिधियों से मांग की है कि गांवों में नियमित रूप से कचरा उठाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. प्रत्येक पंचायत में सफाई कर्मियों की उपस्थिति की निगरानी हो तथा खराब पड़े ठेलों एवं वाहनों की मरम्मत कराई जाए.
साथ ही लोगों को गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग रखने के लिए फिर से जागरूक किया जाए, ताकि स्वच्छता अभियान का उद्देश्य पूरा हो सके और गांवों को साफ एवं सुंदर बनाया जा सके.
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