गोपालगंज में शिक्षक नियुक्ति की पड़ताल, बीईओ को मिला निर्देश

Gopalganj News : गोपालगंज में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षक नियुक्ति के मामलों की जांच तेज कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने दिल्ली राज्य मुक्त विद्यालय (डीएसओएस) के मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की पहचान शुरू की है।

गोपालगंज से विकास दुबे की रिपोर्ट
Gopalganj News : जिले में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षक नियुक्ति के मामले की जांच तेज कर दी गयी है. शिक्षा विभाग ने दिल्ली राज्य मुक्त विद्यालय (डीएसओएस) से प्राप्त मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इस संबंध में जिला शिक्षा कार्यालय की स्थापना शाखा की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. स्थापना डीपीओ मुकेश कुमार ने बताया कि हाल के दिनों में कुछ मामलों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि दिल्ली राज्य मुक्त विद्यालय नामक संस्थान को फर्जी बताया गया है. जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि जिले के कुछ शिक्षकों ने इसी संस्थान से मैट्रिक (सेकेंडरी) अथवा इंटरमीडिएट (सीनियर सेकेंडरी) का प्रमाणपत्र हासिल कर शिक्षक पद पर नियोजन या नियुक्ति प्राप्त की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अब विभाग ने जिलेभर में ऐसे शिक्षकों का ब्योरा जुटाने का फैसला कर लिया है.

सभी प्रखंडों में शुरू हुई रिकॉर्ड की जांच

शिक्षा विभाग स्थापना डीपीओ के आदेश के बाद सभी प्रखंडों के बीइओ प्रखंड स्तर पर शिक्षकों के सेवा अभिलेखों और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच शुरू कर दी है. निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी सरकारी प्राथमिक, मध्य व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का विवरण खंगालें और यह पता लगाएं कि कौन कौन से शिक्षकों ने दिल्ली राज्य मुक्त विद्यालय के मैट्रिक, इंटर या समकक्ष प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी शिक्षकों की सूची एक सप्ताह के भीतर जिला शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी. इसके बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की होगी गहन जांच

सूत्रों के अनुसार सूची मिलने के बाद संबंधित शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच कराई जाएगी. यदि किसी शिक्षक का प्रमाणपत्र फर्जी या संदिग्ध पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है. ऐसे मामलों में नौकरी समाप्त करने, वेतन वसूली और प्राथमिकी दर्ज कराने जैसी कार्रवाई भी संभव है. शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यालयों में योग्य और वैध प्रमाणपत्र रखने वाले शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना जरूरी है. फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वाले लोगों के कारण शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है.

शिक्षा विभाग में गलत प्रमाण पत्रों पर कार्यरत शिक्षकों में बढ़ी हलचल

डीपीओ स्थापना के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में चर्चा का माहौल है. कई विद्यालयों और प्रखंड कार्यालयों में पुराने नियोजन अभिलेखों को खंगाला जा रहा है. विभाग यह जानने का प्रयास कर रहा है कि जिले में ऐसे शिक्षकों की संख्या कितनी है और उनकी नियुक्ति किस अवधि में किस प्रकार हुई थी. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी. किसी भी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसके प्रमाणपत्रों और संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जाएगा. यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

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Published by: YUVRAJ RATAN

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