Gopalganj Lesbian Couple: (सुरेश कुमार राय) गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के एक गांव से 24 अप्रैल को लापता हुई एक बालिग युवती का मामला पुलिस जांच में अप्रत्याशित मोड़ ले लिया. जिस मामले को पुलिस गुमशुदगी और संभावित अपहरण के दृष्टिकोण से जांच रही थी, उसमें पता चला कि युवती उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की एक अन्य युवती के साथ रह रही थी. पुलिस ने दोनों को बरामद कर भोरे थाना लाया है. अब कानूनी प्रक्रिया के तहत युवती का न्यायालय में बयान दर्ज कराया जाएगा.
एक महीने बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
जानकारी के अनुसार, भोरे थाना क्षेत्र की रहने वाली काजल (बदला हुआ नाम) 24 अप्रैल को घर से अचानक लापता हो गई थी. परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद करीब एक महीने बाद युवती की मां ने भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में एक संदिग्ध मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई थी.
मोबाइल लोकेशन से खुला पूरा मामला
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबर का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन खंगाली. जांच में लोकेशन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की मिली. इसके बाद भोरे पुलिस की टीम बलिया पहुंची, जहां लापता युवती एक अन्य युवती आरती (बदला हुआ नाम) के साथ रह रही थी. पुलिस ने दोनों को बरामद कर गोपालगंज ले आई.
डेटिंग ऐप पर हुई थी दोस्ती, चार साल में प्यार में बदला रिश्ता
पुलिस पूछताछ में दोनों युवतियों ने बताया कि उनकी मुलाकात करीब चार वर्ष पहले एक डेटिंग ऐप के माध्यम से हुई थी. बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे लंबे समय से रिश्ते में थीं. दोनों ने बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से साथ रहने का फैसला किया है और अब अलग नहीं होना चाहतीं.
बालिग होने के कारण कानूनी प्रक्रिया पर रहेगा आगे का फैसला
पुलिस के अनुसार, भोरे की युवती बालिग है. ऐसे में न्यायालय में उसका बयान दर्ज कराया जाएगा. बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यदि यह स्थापित होता है कि वह अपनी इच्छा से गई थी और किसी प्रकार का दबाव नहीं था, तो उसी के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
भारत में क्या है कानूनी स्थिति?
भारत में वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंध कानूनी हैं. हालांकि, समलैंगिक विवाह को अभी कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे मामलों में यदि दोनों पक्ष बालिग हों और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों, तो न्यायालय उनके बयान और परिस्थितियों के आधार पर आगे का निर्णय करता है.
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