गोपालगंज. बिहार के प्रमुख शक्तिपीठ थावे में पांच नवंबर की शाम देव दीपावली मनायी जायेगी. देव दीपावली की तैयारियां तेज हो गयी हैं.
मां के दरबार में जगमगाते रोशनी के बीच देव लोक उतर आयेगा. अलौकिक दृश्य होगा. थावे में वर्ष 2011 में देव दीपावली की परंपरा की शुरूआत हुई. उसके बाद से लोक आस्था का प्रतीक बन गया. बंगरा के रिटायर रेल अधिकारी स्व विंध्याचल दुबे की प्रेरणा से मां विंध्यवासिनी के साधक डब्ल्यू बाबा द्वारा इस परंपरा की शुरुआत करायी गयी. खुद डीएम, एसडीओ प्रशासन व न्यायिक पदाधिकारियों द्वारा दीप दान कर देव दीपावली की पूजा की शुरुआत करायी जाती रही है. मंदिर प्रशासन व ग्रामीणों के स्वयं के सहयोग से यहां देव दीपावली मनाने की अनूठा परंपरा रही है. मौसम के खराब रहने के कारण भक्त थोड़े मायूस भी हैं.देव दीपावली की तिथि और मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं राजेश्वरी मिश्र ने कहा कि कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि चार नवंबर को रात 10:36 बजे पर प्रारंभ होगी. इस तिथि का समापन पांच नवंबर को शाम 06:48 बजे है. तिथि के मुताबिक देव दीपावली का त्योहार पांच नवंबर को मनाया जायेगा. इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 5:15 बजे से शाम 7:50 बजे तक मान्य होगा. गोधूलि मुहूर्त-शाम 05:40 से 06:05 बजे तक है. इस अवधि में आप महादेव सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा कर सकते हैं.देव दीपावली के मंगलकारी अवसर पर देवता धरती पर उतरते
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था. मान्यता है कि इस तिथि पर उनकी पूजा-अर्चना करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा यह दिन सृष्टि के संचालक विष्णु जी के मत्स्य अवतार के प्रकट होने से भी जुड़ा है. धार्मिक ग्रंथों की माने, तो देव दीपावली के मंगलकारी अवसर पर देवता धरती में उतरते हैं और दीपावली मनाते हैं. इसलिए इस दिन दीप जलाने का विशेष महत्व होता है. इससे घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली व सकारात्मकता आती है. यही नहीं इस तिथि पर किये गये पुण्य कार्यों का फल भी साधक को अवश्य मिलता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
