भोरे में बुलडोजर अभियान और मनरेगा में कटौती के खिलाफ माले ने किया प्रदर्शन

भोरे. दलित गरीबों के घरों पर चल रहे बुलडोजर अभियान को रोकने और मनरेगा जैसी जनहितकारी योजनाओं को बहाल करने की मांग को लेकर मंगलवार को भोरे प्रखंड मुख्यालय परिसर में खेतिहर ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले एक दिवसीय धरना दिया गया.

By AWEDHESH KUMAR RAJA | January 6, 2026 7:02 PM

भोरे. दलित गरीबों के घरों पर चल रहे बुलडोजर अभियान को रोकने और मनरेगा जैसी जनहितकारी योजनाओं को बहाल करने की मांग को लेकर मंगलवार को भोरे प्रखंड मुख्यालय परिसर में खेतिहर ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले एक दिवसीय धरना दिया गया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाये और बाद में बीडीओ को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा. धरना को संबोधित करते हुए माले प्रखंड सचिव सुभाष पटेल ने कहा कि भीषण शीतलहर के बीच दलितों और गरीबों की बस्तियों को उजाड़ना पूरी तरह से अमानवीय और गैर-संवैधानिक है. सरकार अतिक्रमण हटाने के नाम पर उन लोगों को बेघर कर रही है, जो दशकों से वहां बसे हुए हैं. श्री पटेल ने जोर देकर कहा कि पीपीएच एक्ट 1948 के तहत इन गरीबों को जमीन का पर्चा मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार उन्हें हक देने के बजाय उनके सिर से छत छीन रही है. उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा के बजट में कटौती कर गरीबों के रोजगार के अधिकार पर हमला किया गया है.

बस्तियों को उजाड़ने पर तत्काल लगे रोक

प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कई मांगें उठायीं, जिनमें दलित-गरीबों की बस्तियों को उजाड़ने पर तत्काल रोक लगे और बिना वैकल्पिक व्यवस्था किसी को न हटाया जाये. दशकों से बसे लोगों को पीपीएच एक्ट के तहत जमीन का पर्चा/पट्टा दिया जाये. प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाये. मनरेगा को प्रभावी ढंग से पुनः बहाल किया जाये और चार नये लेबर कोड वापस लिये जाएं. आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर अधिकार की गारंटी दी जाये. धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता बजरंगबली कुशवाहा ने की. इस अवसर पर मुख्य रूप से जनार्दन राजभर, दिनेश यादव, धर्मेंद्र चौहान, कमलेश प्रसाद, ललिता चौहान सहित बड़ी संख्या में खेग्रामस और माले के कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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