बनों तो शिव, रहो तो शिव और जीयो तो शिव

बरौली. रविवार को जैसे थाना चौक से प्रेमनगर आश्रम तक तथा बढेयां मोड़ से प्रेमनगर आश्रम तक जहां तक नजर जाती थी, इंसानी भीड़ का समुद्र जैसे ठाठे मार रही थी.

By SANJAY TIWARI | January 11, 2026 6:26 PM

बरौली. रविवार को जैसे थाना चौक से प्रेमनगर आश्रम तक तथा बढेयां मोड़ से प्रेमनगर आश्रम तक जहां तक नजर जाती थी, इंसानी भीड़ का समुद्र जैसे ठाठे मार रही थी. प्रेमनगर आश्रम के पास स्थित मैदान में तिल रखने तक को जगह नहीं थी. हर तरफ केवल शिवभक्त ही शिवभक्त नजर आ रहे थे. गौरतलब है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रेमनगर आश्रम में शिव शिष्य परिवार द्वारा गुरु महोत्सव का आयोजन प्रेमनगर आश्रम में किया गया था और इसके लिए कई दिन पहले से प्रेमनगर में टेंट, शामियाना आदि का निर्माण शुरू हो गया था. भारी कुहासा और कड़कड़ाती ठंड के बीच रविवार को जब शिव चर्चा कार्यक्रम की शुरुआत हुई, तो आसपास के क्षेत्र पूरी तरह शिवमय हो गये. शिव शिष्य परिवार के अध्यक्ष मुन्ना प्रसाद, गोविंद सिंह आदि ने शिव चर्चा का आयोजन किया. यहां गोपालगंज, सीवान, छपरा, पटना सहित बिहार के कई जिले तथा उत्तरप्रदेश के कई जिलों से भी लोग पहुंचे थे. यहां ठंड के बावजूद हजारों शिवभक्तों नें करीब पांच घंटों तक शिव महिमा का रसास्वादन किया. यहां शिव शिष्यों के द्वारा शिव की महिमा पर गीत संगीत का गायन कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया. दूर-दूर से पहुंचे शिव गुरुभाई तथा गुरुबहनों ने उपस्थित शिव भक्तों को बताया कि शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी प्रकार का कोई बंधन नहीं है. जगत का एक-एक व्यक्ति स्वतंत्र है. भगवान शिव को अपना गुरु बनाने के लिए हरिंद्रानंद जी इस संसार के प्रथम व्यक्ति हैं, जिनके द्वारा शिव को अपना गुरु बनाकर अपने अनुभूति के आधार पर तीन सूत्रों का निरूपण किया गया है. आदमी निरुपाय है लेकिन शिष्य के गुरु उपाय हैं. गुरु अपनी शिष्य को तलाश करते हैं, आवश्यकता है हम सब उन्हें शिव भाव अर्पित करें. शिव के शिष्य अपने गुरु शिव की इच्छा से सृष्टि, जन, जंगल, जल एवं जमीन को सुरक्षित और संरक्षित करने की प्रेरणा देते हैं, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहे, जिससे हम सभी स्वस्थ रहें. अधिक से अधिक पौधों को लगाना एवं उसे सुरक्षा देना एक अहम कड़ी है. दर्जनों शिव भक्तों ने शिव महिमा पर चर्चा की. आयोजन को सफल बनाने में शिवभक्त हृदया प्रसाद, वीरेन्द्र प्रसाद, मन्नु भैया, शांति देवी, शैलकुमारी देवी, बबीता देवी, जगजीतन देवी, निर्मला देवी, राजकुमारी आदि उपस्थित रहे.

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