शराबबंदी कानून से संवरने लगी गांव की सूरत

लक्षवार : साल भर पहिले घर में तनाव रहे. शराब के कारण पूरा घर नरक बन गइल रहे. शराब पीके घर लौटते ही मारपीट और झगड़ा शुरू हो जात रहे. आज घर में शांति, अमन और चैन लौट आयी है. यह कहना है लक्षवार दलित बस्ती में रहनेवाली शिवकुमारी देवी का. शिवकुमारी देवी के पति […]

लक्षवार : साल भर पहिले घर में तनाव रहे. शराब के कारण पूरा घर नरक बन गइल रहे. शराब पीके घर लौटते ही मारपीट और झगड़ा शुरू हो जात रहे. आज घर में शांति, अमन और चैन लौट आयी है. यह कहना है लक्षवार दलित बस्ती में रहनेवाली शिवकुमारी देवी का. शिवकुमारी देवी के पति हरीलाल राम शराब के नशे मेें धुत रहते थे. 100 रुपया कमा कर 50-60 रुपया शराब में उड़ा देते थे. शिवकुमारी आज मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती है. काश! यह निर्णय और पहले लिया गया होता

, तो उसका घर आज स्वर्ग बना रहता. बेटी, ममता कुमारी, शिल्पी कुमारी, बेटा अशोक कुमार आदि को पढ़ाने की जवाबदेही भी हरीलाल ने उठा लिया है. आज अपने परिवार की जिम्मेवारी को समझते हुए उसके निर्वहन के लिए गुजरात की एक कंपनी में काम कर रहा है. यह कहानी सिर्फ शिवकुमारी का ही नहीं बल्कि इस बस्ती के सैकड़ों परिवारों की थी. आज गांव शराबमुक्त होकर खुशहाली के बीच है. अब तो घर घर नल जल, शौचालय, बिजली, सड़क की व्यवस्थ हो चुकी है. इधर, शिवकुमारी देवी की गोतनी जीविका दीदी के रूप में काम कर रही है. उसका कहना है कि जब शराब बंद हुआ तब से इस गांव में शांति लौट आयी है.

हर शाम को लोग आपस में गाली-गलौज करते थे. कई बार मारपीट हो जाती थी. महिलाएं सब्जी के लिए शाम को इंतजार करती थीं. नशे में धुत होकर लौटनेवाले पति जब खाली हाथ आते, तो फाकाकशी में रात गुजर जाती थी. आज मुख्यमंत्री जी के निर्णय से सब कुछ बदल गया है. आज 100 रुपया कमानेवाले आज घर में सब्जी से लेकर हर जिम्मेवारी को निभा रहे हैं. खास कर महिलाओं में एक नयी उम्मीद के साथ विकास की किरण निकल आयी है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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