ठंड का वार. शीतलहर और कुहासे से जनजीवन अस्त-व्यस्त
गोपालगंज : रात में पछिया हवा शीतलहर को बढ़ा रही, तो दिन में पुरवइया हवा ने कुहासे की सितम ढाह रही थी. सर्द हवा के कारण अचानक तापमान गत दो दिनों में अधिकतम पांच डिग्री सेल्सियस गिरा है, तो न्यूनतम भी चार डिग्री सेल्सियस गिरा है. मंगलवार को अधिकतम तापमान 27.2 से घट कर 22.4 तथा न्यूनतम तापमान 14.9 से घट कर 12.1 डिग्री पर आ गया. दिन और रात के तापमान में निरंतर हो रही गिरावट से लोग ठंडक बढ़ने लगी है. मंगलवार की सुबह कब हुआ पता ही नहीं चला. कुहासे के कारण दिन के दो बजे बादलों को चीरते हुए सूर्य ने दर्शन तो दिये, लेकिन महज दो घंटा बाद पुन: कुहासे ने अपने आगोश में ले लिया. नतीजा था कि दिन में भी वाहन हाइवे पर लाइट चला कर रेंगते हुए नजर आये. जबकि ठंड के बीच कांपते हुए स्कूली बच्चे स्कूल जाने को विवश हुए.
ठिठुराती ठंड में यातायात कम रहा. शाम होते-होते गलन बढ़नी शुरू हो गयी. सड़कों पर सन्नाटा पसर गया. ग्रामीण इलाकों में बाजार शाम छह बजते ही बंद हो गयी. जबकि शहर में भी शाम सात बजे के बाद सन्नाटा पसर गया. मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय की माने, तो आर्द्रता 96 फीसदी पहुंच गयी है. विजिविल्टी पांच मीटर तथा हवा का रुख तीन किमी प्रतिघंटा पछिया चल रहा. आसमान में बादल छाये हुए हैं. जो कभी भी बूंदा- बांदी करा सकता है. मौसम विभाग की मानें,
तो आगामी दिनों में ठंड बढ़ेगी. सार्वजनिक स्थानों पर अलाव ही सहारा है लेकिन जिला प्रशासन अभी इसकी कोई व्यवस्था नहीं की है. जबकि शीतलहर और ठंड के कारण रात में यात्रा करनेवाले यात्रियों एवं रिक्शाचालकों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा. शाम सात बजते ही शहर में रिक्शावाले भी खोजने पर नहीं मिल रहे. बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सदर अस्पताल के अलावे शहर के प्रमुख चौक पर लोगों को रात में ठिठुरना पड़ रहा. शहर में एक दर्जन वैसे लोग हैं, जो फुटपाथ पर सो कर रात बिताते हैं. उनके लिए मुश्किल हो गया है.
हालांकि प्रशासन स्तर पर 15 दिसंबर से अलाव जलवाने की व्यवस्था करने के लिए कहा है.
निजी स्कूलों के समय से लाडले परेशान
निजी स्कूलों के समय के कारण लाडलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा. निजी स्कूलों ने ठंड के मौसम में भी बदलाव नहीं किया है. सुबह आठ बजे से अधिकतर स्कूल का क्लास चलता है. आठ बजे क्लास के कारण बसे सुबह सात बजे ही अड्डे पर पहुंच जाती है, जिसके कारण बच्चों को सुबह पांच बजे जगना पड़ता है. नहा- धोकर तैयार कराने में अभिभावको को भी कम कठिनाई नहीं है. जिला प्रशासन का निजी स्कूलों पर कोई नियंत्रण नहीं होने के कारण ठंड में बच्चों को जान सांसत में है.
दिन में भी वाहनों को जलानी पड़ी लाइट
मंगलवार को ठंड के बीच स्कूल जाते बच्चे.
