कुपोषण से जंग में उद्देश्य पर फिर रहा पानी

नोटबंदी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1.29 लाख लाभुकों को नहीं मिल रहा पुष्टाहार गोपालगंज : नोटबंदी का असर आम से लेकर खास तक के जीवन पर पड़ा है. गांव हो या शहर हर जगह कोहराम मचा है. सरकारी विभाग भी नोटबंदी की चपेट में हैं. इसका सबसे अधिक कुप्रभाव आंगनबाड़ी केंद्रों पर देखा जा रहा है, […]

नोटबंदी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1.29 लाख लाभुकों को नहीं मिल रहा पुष्टाहार

गोपालगंज : नोटबंदी का असर आम से लेकर खास तक के जीवन पर पड़ा है. गांव हो या शहर हर जगह कोहराम मचा है. सरकारी विभाग भी नोटबंदी की चपेट में हैं. इसका सबसे अधिक कुप्रभाव आंगनबाड़ी केंद्रों पर देखा जा रहा है, जहां कुपोषण से जंग चल रही है. आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक माह वितरित होनेवाला टेक होम राशन नवंबर में नहीं मिला है. अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों के बैंक खाते दी-सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक एवं उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में हैं. बैंक में कैश संकट होने के कारण राशि की निकासी नहीं हो रही है. राशि के अभाव में आंगनबाड़ी सेविका टीएचआर का वितरण नहीं कर रही हैं.
इससे आंगनबाड़ी केंद्र के पोषक क्षेत्र के आठ गर्भवती, आठ धात्री महिलाएं एवं 28 कुपोषित के साथ-साथ 12 अति कुपोषित बच्चों को भी पुष्टाहार नहीं मिल रहा है. वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन बननेवाला पोषाहार भी राशि के अभाव में जैसे-तैसे चल रहा है. केंद्र की सेविका या तो दुकानदार से उधार लेकर पोषाहार बना रही हैं या फिर बैंक से छोटी रकम की निकासी कर काम चलाया जा रहा है.
नोटबंदी के कारण जिले के 2290 आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाभान्वित होनेवाले 1.29 लाख लाभुकों को पुष्टाहार नहीं मिल रहा है. बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई कर वापस अपने लौट रहे हैं. आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलनेवाले पूरक आहार भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में नोटबंदी का असर कुपोषण की जंग पर भी पड़ रही है.
राशि आते ही बंटेगा टीएचआर
अधिकांश परियोजना का बैंक खाता को-ऑपरेटिव व उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में है. राशि उपलब्ध होते ही बैंकों से निकासी कर टीएचआर का वितरण कराया जायेगा. इसके लिए बैंक के शाखा प्रबंधकों को पत्र लिखा गया है.
रजनीश कुमार राय, डीपीओ, गोपालगंज

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