बंजरिया गांव में हर तरफ है बेचैनी

महम्मदपुर : सुबह के आठ बजे हैं. बंजरिया गांव में हर तरफ बेचैनी है. संकट से बेपरवाह बच्चे उछल-कूद मचा रहे हैं. रामावती हाथों में पेटी लिये नाव को बुला रही है. बगल में रामनारायण के परिवार के लोग जिसको जो बन पड़ा है हाथ और माथे पर सामान लिये खड़े हैं. पूछने पर कहते […]

महम्मदपुर : सुबह के आठ बजे हैं. बंजरिया गांव में हर तरफ बेचैनी है. संकट से बेपरवाह बच्चे उछल-कूद मचा रहे हैं. रामावती हाथों में पेटी लिये नाव को बुला रही है. बगल में रामनारायण के परिवार के लोग जिसको जो बन पड़ा है हाथ और माथे पर सामान लिये खड़े हैं. पूछने पर कहते हैं कि जहां ऊंची जगह मिली वहीं शरण ले लेगें.

यह नजारा है बंजरिया गांव का, जो पूरी तरह पानी से घिर चुका है. कल तक हंसती-खेलती और अपने काम में लीन जिंदगी आज ऊंचे स्थान पर शरण लेने के लिए बेचैन है. कहां जाना है, इसका ठिकाना नहीं है. सिर्फ ऊंची जगह चाहिए. पूर्वांचल के एक दर्जन तटवर्ती गांवों में पानी फैल चुका है. पांच हजार से अधिक की आबादी आफत में है. कई परिवारों के चूल्हे-चौके बंद हैं.

नतीजतन बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं. बुधवार को भी गंडक के जल स्तर में कोई खास कमी नहीं आयी. गांवों में पानी का फैलना जारी है. सलेमपुर के तटवर्ती गांव, बंजरिया, रमपुरवां, रामचंद्रापुर, टंडसपुर में पूरी तरह पानी फैल चुका है. आने-जाने क रास्ते बंद हैं. गांव का संपर्क बाहर से टूट चुका है. सहायता के नाम पर बाढ़ में फंसे इन लोगों को कोई मदद अब तक नही मिली है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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