गोपालगंज : गंडक नदी में आयी बाढ़ के शिकार हुए पीड़ित महज एक अदद पॉलीथिन के लिए तरस रहे हैं. प्रशासन की तरफ से किसी तरह का कोई सहयोग उपलब्ध नहीं कराया गया है. नदी का पानी बढ़ने के साथ ही इनके घरों में घुस गया है. घर में रखा अनाज, जलावन सब कुछ पानी में बह गये. तटबंध पर खुले आसमान के नीचे छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं पशुओं को लेकर प्रशासन की राह देख रहे हैं.
बाढ़ के लिए बनाये गये राहत शिविर का भी कोई अता-पता नहीं है. सिपाया तटबंध पर छठू राम ने बताया कि नदी का पानी पिछले तीन दिनों से लोगों के घर में घुसा हुआ है. कई लोग घर में घिरे हुए हैं. पर्याप्त नाव नहीं होने से उन्हें गांव से बाहर नहीं निकाला जा सका है, जबकि शिवजी ठाकुर ने कहा कि घर छोड़ कर तटबंध पर आये लोगों को पॉलीथिन की सख्त जरूरत है. प्रशासन के अधिकारी चुपी साधे हुए हैं. अब तक अंचल पदाधिकारी या किसी अन्य पदाधिकारी के द्वारा इस क्षेत्र की राहत मुहैया नहीं करायी गयी है.
चापाकल गंदा पानी दे रहा है.सांप और बिच्छू का अलग से खौफ : सासामुसा. कुचायकोट प्रखंड के सिपाया स्थित सारण मुख्य तटबंध के पास सैकड़ों की संख्या में बाढ़पीड़ितों ने शरण ले रखी है. उन्हें खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ रही है. सांप और बिच्छू का भी खतरा बना हुआ है. जहरीला सांप कब किसको डंस ले कहना मुश्किल है. स्थिति यह है कि दिन हो या रात सांप, बिच्छू, जंगली जानवरों से खतरा बना हुआ है.
बकुआ खाप मकसुदपुर में बिगड़ी हालत : गोपालगंज. सदर प्रखंड के खाप मकसुदपुर में बाढ़पीड़ितों की हालत बिगड़ गयी है. खाप मकसुदपुर के अलावा जागीरीटोला और कटघरवा में भी स्थिति भयावह है. यहां लगभग पांच हजार की आबादी सांसत में पड़ी हुई है. विधायक सुबास सिंह के साथ गये एसडीओ मृत्युंजय कुमार तथा कृृष्ण मोहन प्रसाद ने भी स्थिति की जानकारी ली. अधिकारियों ने जिला प्रशासन को भयावहता की जानकारी दी है.
उधर विधायक सुबास सिंह पीड़ितों के बीच चूड़ा और गुड़ बांटने की तैयारी में जुट गये हैं. विधायक ने कहा कि मंगलवार को पीड़ितों के बीच चूड़ा-गुड़ का वितरण किया जायेगा.
