हास्यास्पद – यह कैसा अभियान, कल मिली आजादी, आज फिर संभाल रहे होटल का काम ऑपरेशन मुस्कान पर भारी पड़ रही पेट की आगकॉपी-किताब की जगह कप-प्लेट बना 18137 बच्चों का भविष्यऑपरेशन के नाम पर कोरम पूरा करने में जुटी जिले की पुलिसग्रामीण बाजारों में आज तक नहीं चला पुलिस का ऑपरेशन मुस्कानफोटो – 6 थावे रोड स्थित गुप्ता होटल में जूठा बरतन धोता बाल मजदूरफोटो – 7 – थाना रोड में लाइन हाेटल में बाल मजदूरी कर रहे मासूम बच्चाफोटो -8 – कचहरी रोड में पेट के लिए मजदूरी करने निकला मासूम बच्चाबाल मजदूरी अपराध है. इस रोकने के लिए सरकार ने कानून बना रखा है. इस कानून का पालन कराने के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है. बच्चों से बाल श्रम तथा मानव तस्करी को रोकने के लिए भारत सरकार के आदेश पर ऑपरेशन मुस्कान की शुरुआत की गयी है. इसकी जिम्मेवारी पुलिस को दी गयी है. पुलिस ने जुलाई, 2015 में एक महीना ऑपरेशन कागज पर चलाया. 12 जनवरी को ऑपरेशन मुस्कान के तहत 30 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया. इसके दूसरे दिन पुन: सभी बच्चे होटलों पर काम करते देखे गये. संवाददाता, गोपालगंजजिले में पुलिस के ऑपरेशन मुस्कान पर पेट की आग भारी पड़ रही है. पुलिस जिन बच्चों को होटल, गैराज और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर मुक्त कराया, आज फिर वे पेट की अाग बुझाने के लिए उसी होटल, दुकान, गैरेज पर काम करते देखे जा रहे हैं. ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुक्त कराये गये 30 बच्चों के साथ पुलिस ने फोटो खिंचावाया. यह खबर अखबारों की सुर्खियां बनीं. मुक्त कराये गये बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया. बच्चे जब घर पहुंचे, तो उनके पास रात में खाने के लाले पड़े थे. पेट की आग ने दूसरे दिन ही फिर से होटल पर काम करने के लिए विवश कर दिया. उन्होंने मालिक से विनती कर फिर काम संभाल लिया. आज स्थिति यह है कि अगर इन बच्चों को काम से हटा दिया जाये, तो इनके पूरे परिवार को रोटी नसीब नहीं होगी. कुछ केस नीचे नमूने के तौर पर दिये जा रहे हैं, जिनका कानूनी कारणों से नाम बदला हुआ है. केस एक- महम्मदपुर का रहनेवाला राजेश कुमार (12 वर्ष) ऑपरेशन मुस्कान के तहत डाकघर चौक स्थित चाय की दुकान से मुक्त कराया गया. पुलिस ने उसे परिजनों को सौंप दिया. रात में उसके घर में अनाज के अभाव में फाकाकशी हो गयी. मजबूरन बुधवार की सुबह फिर दुकान पर काम करने लगा.केस दो – रवि कुमार की उम्र 10 वर्ष है. वह फुलवरिया प्रखंड के बथुआ का रहनेवाला है. पिछले चार साल से शहर के एक होटल में कप-प्लेट धोता है. ऑपरेशन मुस्कान के तहत उसे भी दुकान से मुक्त कराया गया, लेकिन वह आज भी होटल में कप धोते हुए देखा जा रहा है.मजदूरों के संभावित आंकड़ेहोटल में कप-प्लेट धोने में जुटे- 3047गैराज में खतरनाक काम में जुटे – 2290ठेले पर प्रतिदिन मजदूरी करते- 2582शहर में कचरे पर प्लास्टिक बीनते – 2095घरेलू कार्य में नौकरी करते – 3560अन्य मजदूरी में लगे – 4560कुल – 18137 एक्सपर्ट ब्यूहबाल मजदूरी करानेवाले पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर लेवर एक्ट के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है. इसके साथ ही बाल मजदूर अगर मुक्त होते हैं, तो उन्हें बाल संरक्षण गृह में रखने का प्रावधान है. उनके खाने-पीने और रहने की व्यवस्था के साथ पढ़ाई की उचित व्यवस्था करनी चाहिए थी, जो नहीं होने के कारण पुन: मुक्त कराये गये बाल मजदूर विवशता में काम कर रहे हैं.फोटो- 8 ए – अधिवक्ता, अंशु मिश्रक्या कहते हैं अधिकारीऑपरेशन मुस्कान के तहत मुक्त कराये गये वैसे बाल मजदूरों को उनके परिजनों को सौंपने तक की जिम्मेवारी पुलिस की थी . अगर फिर से वे बच्चे होटलों में काम करने लगे हैं, तो निश्चित ही गंभीर विषय है और इस पर कार्रवाई की जायेगी.फोटो- 8 बी – नरेशचंद्र मिश्र, डीएसपी मुख्यालय, गोपालगंज
ऑपरेशन मुस्कान पर भारी पड़ रही पेट की आग
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