(संशोधित) नवरूणा हत्याकांड : रसूखों ने बचने की जुगत में साक्ष्य से की छेड़छाड़

(संशोधित) नवरूणा हत्याकांड : रसूखों ने बचने की जुगत में साक्ष्य से की छेड़छाड़- घटना के चार साल बाद भी नवरूणा के कातिल पकड़ से दूर और न ही सुलझ पायी मर्डर मिस्ट्री- इसमें शामिल बड़े रसूखदारों ने तो पहले भी करवाया था साक्ष्यों से छेड़छाड़- हत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं, अब साक्ष्य […]

(संशोधित) नवरूणा हत्याकांड : रसूखों ने बचने की जुगत में साक्ष्य से की छेड़छाड़- घटना के चार साल बाद भी नवरूणा के कातिल पकड़ से दूर और न ही सुलझ पायी मर्डर मिस्ट्री- इसमें शामिल बड़े रसूखदारों ने तो पहले भी करवाया था साक्ष्यों से छेड़छाड़- हत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं, अब साक्ष्य से छेड़छाड़ की बात आने लगी सामनेसंवाददाता, पटनानवरूणा अपहरण सह हत्या कांड के मामले की जांच सीबीआइ पिछले दो साल से कर रही है. अब तक हुई जांच में यह तो स्पष्ट हो चुका है कि नवरूणा की हत्या कर दी गयी है. इसके बाद अब सीबीआइ इस कांड को अंजाम देने वाले बड़े चेहरों और जमीन माफियाओं समेत अन्य सभी दोषियों को दबोचने की जुगत में लग गयी है. इनके खिलाफ हर स्तर पर तमाम अहम और ठोस सबूतों को इकट्ठा किया जा रहा है. इसकी प्रक्रिया भी तकरीबन अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. परंतु सीबीआइ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन सबूतों में छेड़छाड़ करने की बात सामने आ रही है. यह भी उजागर हुआ है कि पहले से बरामद किये गये सबूतों में बहुत बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की गयी थी. इस कारण से सीबीआइ को दोषियों के खिलाफ सबूत जुटाने में बेहद मशक्कत करनी पड़ रही है. सूत्र बताते हैं कि सीबीआइ को उसकी हत्या होने के साक्ष्य पूरी तरह से मिल चुके हैं. बावजूद इसके घटना होने के चार साल बाद भी नवरूणा के हत्यारों या अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी नहीं हो पायी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब इसके साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या पूरी तरह से मिटाने की बात सामने आने लगी है. सबसे प्रमुख साक्ष्य कंकाल में ही बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने की बात उजागर हुई है. बड़े चेहरों और जमीन माफिया साक्ष्य को बिगाड़ कर बचने के लिए साक्ष्य को बिगाड़ा गया था, ताकि इन तक सीबीआइ नहीं पहुंच सके. इस बेहद चर्चित अपहरण सह हत्या कांड के करीब चार साल बाद यह तो पूरी तरह से साफ हो गया है कि नवरूणा की हत्या हो गयी है. उसके घर के पास से बरामद कंकाल के डीएनए का मिलान तो कुछ महीने पहले ही नवरूणा के माता-पिता के डीएनए से हो गया था. परंतु बड़े रसूखदारों को दबोचने के लिए साक्ष्य पूरी तरह से नहीं जुटने के कारण जांच अंतिम पड़ाव पर पहुंच नहीं पा रही है.सीबीआइ को मिले कंकाल की बदल रही हकीकतइस मामले के जांच का जिम्मा फरवरी, 2014 में सीबीआइ को सौंपी गयी थी. उस समय सीबीआइ को इससे संबंधित सबूत एकत्र करने में बेहद दिक्कत हुई थी. क्योंकि स्थानीय पुलिस और माफिया ने भी इससे जुड़े सभी सबूतों को मिटाने की जोरदार कोशिश की थी. जांच के दौरान सीबीआइ को नवरूणा के घर से कुछ ही दूरी पर मौजूद नाले से एक आधा कंकाल बरामद हुआ था, जो उसकी हत्या का अहम सबूत है. अब इसमें छेड़छाड़ होने की बात सामने आयी है. इससे साक्ष्य प्रभावित हो रहे हैं.जांच एजेंसियों में यह विवादसीबीआइ का मानना है कि प्राप्त कंकाल के साथ छेड़छाड़ की गयी थी, जिसमें एफएसएल की भूमिका भी हो सकती है. एफएसएल का कहना है कि उसे कोई कंकाल बरामद ही नहीं हुआ था और न ही उसने कभी कंकाल की जांच की है. बरामदगी के बाद कंकाल को कुछ समय के लिए स्थानीय थाना में भी रखा गया था और इसकी जांच पीएमसीएच में करवायी गयी थी. परंतु उस दौरान नवरूणा के माता-पिता ने डीएनए सैंपल देने से मना कर दिया था, जिस कारण इसका मिलान नहीं हो सका था. सितंबर, 2012 में जब नवरूणा का अपहरण हुआ था. शुरू के दो साल इसकी जांच राज्य पुलिस के पास ही थी. इस दौरान राज्य एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम ने उसके घर समेत वारदात स्थल से जुड़े तमाम स्थानों से बायोलॉजिकल नमूने एकट्ठा किये थे. इनमें कहीं से नवरूणा की मौत के सबूत नहीं मिले थे. एफएसएल के सूत्र बताते हैं कि उस दौरान टीम को किसी तरह का कंकाल भी नहीं बरामद हुआ था.

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