गड़बड़ झाला. किसानों को अनुदान एक हजार, लाभ महज 320 रुपये का

गोपालगंज : कृषि मेले के अनुदान में सरेआम घोटाला किया जा रहा है. कृषि यांत्रिकीकरण पर दिया जा रहा अनुदान का शत-प्रतिशत फायदा किसानों तक नहीं पहुंच रहा है. कारण स्पष्ट है कि जिस यंत्र की कीमत बाजार में 120 रुपये है, वह कृषि मेले में 198 रुपये में बिक रहा है. ऐसे में किसानों […]

गोपालगंज : कृषि मेले के अनुदान में सरेआम घोटाला किया जा रहा है. कृषि यांत्रिकीकरण पर दिया जा रहा अनुदान का शत-प्रतिशत फायदा किसानों तक नहीं पहुंच रहा है. कारण स्पष्ट है कि जिस यंत्र की कीमत बाजार में 120 रुपये है, वह कृषि मेले में 198 रुपये में बिक रहा है. ऐसे में किसानों को अनुदान का लाभ मामूली मिल रहा है. हाल ही में लगे कृषि मेले में सिंचाई के फोल्डिंग पाइप 198 रुपये किलो बेचा गया,

जबकि बाजार में बिना वाउचर लिये उसकी कीमत 120 रुपये किलो है. यदि कोई किसान टीन और वैट के साथ वाउचर लेता है तब उसकी कीमत 132 रुपये किलो है. ऐसे में किसानों को 10 किलो पर बाजार के अनुपात में महज 320 रुपये का अनुदान मिल रहा है, जबकि विभाग उसको एक हजार रुपये अनुदान देने का दावा कर रहा है.

सवाल यह है कि आखिर 650 रुपये कहां गये. इसका जवाब न तो दुकानदार के पास है और न ही विभाग के पास. यह मामला अकेले फोल्डिंग पाइप पर नहीं बल्कि उन सभी यंत्रों का जो कृषि मेले मे बिकते हैं. जिले को इस बार 4.81 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है, लेकिन वास्तविकता यह है कि महज 30 फीसदी राशि से ही किसान लाभान्वित हो पा रहे हैं.

दुकानदारों की मनमानी भी कम नहीं : दुकानदार के पास किसान अगर सिंचाई पाइप खरीदने जाता है, तो उसे 120 रुपये किलो दिया जा रहा है. अगर वैट के साथ लेता है, तो 132 रुपये दिया जाता है. जैसे ही किसान मेले का परमिट दे रहा है, तो उसे 198 रुपये का रेट बताया जाता है. मेले का परमिट है, तो 198 रुपये किलो का रेट देना होगा.
66 रुपये प्रति किलो का घालमेल है.
परमिट लेने के लिए करनी पड़ती है मशक्कत : किसान को सिंचाई पाइप लेने के लिए कृषि विभाग से बकायदा परमिट लेना होता है. इस परमिट के लिए किसान को 50 रुपये जमा कर नेट पर आॅनलाइन फाॅर्म भरना पड़ रहा है. उसके बाद किसान सलाहकार से लेकर बीएओ और डीएओ कार्यालय तक चक्कर लागने की बाद उन्हें परमिट मिल पा रहा है.

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