फ्लायर : 46 शवों को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा अज्ञात शवों को रखने की नहीं है व्यवस्थागोपालगंज. गोपालगंज जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से बरामद अज्ञात 46 शवों की शिनाख्त नहीं हो पायी है. इसके कारण उन मृतकों को कंधे देनेवाले नहीं मिले. पुलिस अधिकतर शवों को आनन-फानन में नदी में प्रवाहित करा देती है. अक्सर ऐसे शवों को दफनाने के नियम-कायदे को ताक पर रख दिया जाता है. शवों की शिनाख्त हो सके इसके लिए कोई कारगर व्यवस्था नहीं है. प्रचार-प्रसार तक नहीं किया जाता है.हर दिन होता है हादसा अज्ञात शवों को तीन दिनों तक रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं है. उन शवों में सबसे अधिक सड़क हादसे में मरनेवालों की संख्या है. इसके अलावा ट्रेन से कट कर मरनेवालों की संख्या भी है. जिले में कई ऐसी जगह हैं, जो हत्या करने के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं. पुलिस अक्सर वहां से लाशें बरामद करती हैं. जिले में अब तक अज्ञात 14 लोगों की हत्याएं हुई हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पायी है. बताया जाता है कि अज्ञात शवों की तसवीर खीची जाती है. मगर, उसे सार्वजनिक नहीं किया जाता है. समाचार पत्र एवं न्यूज चैनल पर भी यहां से अज्ञात शवों के बारे में प्रचारित नहीं किया जाता है.दफनाये जाते हैं अज्ञात शव गोपालगंज सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के बाद अज्ञात शवों को अक्सर प्लास्टिक में लपेट कर गंडक में प्रवाहित कर दिया जाता है. शायद ही कभी नियम के अनुसार शवों को जलाया गया है. मामूली खर्च पर अज्ञात शव दफनाने का सिलसिला जारी है.इनका मिला शव पुरुष – 07 महिला -22किशोर -9किशोरी – 08अज्ञात शव दफनाने के क्या है नियम -अज्ञात शव मिलने पर सबसे पहले उसकी तसवीर लेनी है -तसवीर को अखबार व टेलीविजन के माध्यम से प्रचारित कराना है-पड़ोसी जिले के थाने को सूचित करना है-सार्वजनिक जगहों पर मृतक की तसवीर लगानी है -पोस्टमार्टम के बाद तीन दिनों तक मोर्ग में सुरक्षित रखना है-दफनाने के पहले जिस समुदाय के व्यक्ति का शव हो उस समुदाय के संगठन को सूचना देना -सरकारी तौर पर प्रति शव 12 सौ रुपये खर्च करना है असुरक्षित है पोस्टमार्टम हाउस गोपालगंज पोस्टमार्टम हाउस की सुरक्षा का हाल दयनीय है. पीएम हाउस में रखे गये अज्ञात शवों को कई बार कुत्ते खींच कर ले गये. इसके बावजूद यहां पर सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. साथ ही पोस्टमार्टम हाउस की नियमित साफ-सफाई तक नहीं होती है. सदर अस्पताल में शव को रखने की व्यवस्था नहीं है.दफनाने के मिलते हैं तीन हजारअगर थाने के फंड में राशि उपलब्ध नहीं है, तो जिस इलाके के शव बरामद होते हैं, वहां के मुखिया या वार्ड पार्षद के माध्यम से कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत शव को दफन करने के लिए तीन हजार रुपये मिलते हैं.खर्च नहीं हो पाते हैं 25 हजार गोपालगंज जिले में 21 थाना एवं दो सहायक थाने हैं. प्रत्येक थाने में अज्ञात शव के लिए 25 हजार रुपये उपलब्ध हैं, फिर भी अज्ञात शव को जैसे -तैसे नदी में ठिकाने लगाये जाने की बात सामने आती रहती है. सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के बाद अज्ञात शव को अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया जाता है. कभी-कभी तीन दिनों तक रखने की नौबत आती है, तो व्यवस्था पोस्टमार्टम हाउस में की जाती है. ऐसे तो शव लानेवाली पुलिस पूरी तरह जिम्मेवार है. डाॅ विंदेश्वरी शर्मा, प्रभारी सीएस
फ्लायर : 46 शवों को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा
फ्लायर : 46 शवों को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा अज्ञात शवों को रखने की नहीं है व्यवस्थागोपालगंज. गोपालगंज जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से बरामद अज्ञात 46 शवों की शिनाख्त नहीं हो पायी है. इसके कारण उन मृतकों को कंधे देनेवाले नहीं मिले. पुलिस अधिकतर शवों को आनन-फानन में नदी में प्रवाहित करा […]
