बिहारी युवाओं की छोटी नौकरियों में दिलचस्पी कमीबेहतर अवसर की चाह में श्रम विभाग के नियोजन मेले में कम पहुंच रहे हैं बेरोजगारदीपक कुमार मिश्रा, संवाददाता बिहारी युवाओं के सपने भी बड़े होते जा रहे हैं. वे भी बेहतर जीवन जीने और बेहतर नौकरी की चाह रखते हैं. श्रम संसाधन विभाग की ओर से लगने वाले नियोजन मेले में पहुंचने वाले बेरोजगारों की संख्या में कमी आ रही है. वर्ष 2008-09 में राज्य में लगे नियोजन मेलों में जहां पांच लाख से अधिक लोग नौकरी का आस में पहुंचे थे, वहीं चालू वर्ष में यह घटकर 1.40 लाख रह गया है. नौकरी की चाह में सूबे के युवा पलायन न करें, इसके लिए श्रम संसाधन विभाग जिलों में नियोजन मेले का आयोजन करता है. 2009-09 में जब मेला लगा तो उसमें 5.29 लाख लोग नौकरी की आस में आवेदन दिया, इसमें नौकरी मिली 16 हजार लोगों को. नियोजन मेला में पहुंचने वाले नियोक्ताओं की संख्या में तो लगातार बढ़ोतरी हुई, लेकिन मेले में पहुंचनेवालों की संख्या में कमी आयी. जानकार बताते हैं कि नियोजन मेले में बड़ी कंपनियां नहीं के बराबर पहुंचती हैं. मेले में सबसे अधिक वैकेंसी निजी सुरक्षाकर्मी, बीमा सलाहकार व अन्य छोटी-मोटी नौकरियों के लिए होती हैं. पिछले नौ लाल के दौरान नियोजन मेले में 17 लाख से अधिक लोगों ने नौकरी कि लिए आवेदन दिया. इसमें से 25 फीसदी यानी 4.48 लाख को नौकरी मिली. बड़ी कंपनियों के नहीं आने की वजह से अच्छी नौकरी पाने की उम्मीद लगाए लोग नहीं पहुंचते हैं. सबसे कम आवेदन 86 हजार वर्ष 2011-12 में आया था. वर्ष 2014- 15 में हालांकि संख्या में इजाफा हुआ और मेला में 2.70 लाख लोगों ने आवेदन दिया, जिसमें से 1.28 लाख लोगों को नौकरी मिली. श्रम संसाधन विभाग के नए मंत्री विजय प्रकाश का प्रयास है कि नियोजन मेला में प्रतिष्ठित और बड़ी कंपनियां आएं, ताकि राज्य के बेरोजगारों को यहीं बेहतर अवसर मिले.
बिहारी युवाओं की छोटी नौकरियों में दिलचस्पी कमी
बिहारी युवाओं की छोटी नौकरियों में दिलचस्पी कमीबेहतर अवसर की चाह में श्रम विभाग के नियोजन मेले में कम पहुंच रहे हैं बेरोजगारदीपक कुमार मिश्रा, संवाददाता बिहारी युवाओं के सपने भी बड़े होते जा रहे हैं. वे भी बेहतर जीवन जीने और बेहतर नौकरी की चाह रखते हैं. श्रम संसाधन विभाग की ओर से लगने […]
