गोपालगंज : प्याज और दाल के बाद अब लहसुन भी आंख दिखा कर खरीदारों को डराने लगा है. फुटकर भाव में तेजी आ गयी है. तेजी भी मामूली नहीं, सीधे पहली बार ‘डबल सेंचुरी’ का रेकाॅर्ड. पूरे साल सुस्त रहने के बाद महीने भर की चाल में लहसुन के थोक भाव गुणवत्ता और चमक के अनुसार प्रति किलो 60-105 से बढ़ कर 70-140 रुपये तक पहुंच गये. फुटकर में पहली बार लहसुन 200 रुपये किलो बिक रहा है. इसके पहले 2007 में लहसुन 100 रुपये तक पहुंचा था. मालूम हो कि लहसुन की रफ्तार पूरे साल सुस्त रही.
नवंबर के पहले हफ्ते में बोआई की मांग निकलने पर इसमें चाल आयी. उस समय थोक मंडी में देसी और राजस्थान के लहसुन के भाव 60-85 एवं 70-105 रुपये थे. फुटकर में भाव था 125 रुपये. तबसे इसमें तेज बनी हुई है. 15 दिनों में इसमें खासी तेजी आयी है.
कारोबार से जुड़े राजेश गुप्ता के अनुसार तेजी के आसार शुरू से थे. जनवरी से मार्च तक की बेमौसम बारिश से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की फसल को खासी क्षति पहुंची थी. संयोग से राजस्थान की फसल बहुत अच्छी थी. राजस्थान से आनेवाले लहसुन ने ही साल भर बाजार को संभाला. अगर राजस्थान का लहसुन नहीं होता, तो कीमत 3-4 माह पहले ही इस स्तर तक पहुंच गयी होती. कीमत अभी और बढ़ सकती है. प्रदेश में लहसुन है नहीं.
बोआई का रकबा घटा
तेजी अगले साल भी बनी रह सकती है. जिले में मौसम की मार से फसल आधी से कम थी. व्यापारियों और किसानों ने जो माल रोक रखा था, उसे सीजन के अंत में बढ़िया भाव मिलने पर बोने के बजाय निकाल दिया.
इससे बोआई का रकबा घटा है. रबी की बाकी फसलों की तरह बोआई के समय अपेक्षित नमी न होना भी रकबा घटने की वजह है. ऐसा पहली बार हुआ जब राजस्थान के लहसुन के आगे देसी लहसुन की चमक फीकी पड़ गयी. बाजार में चीन के माल का ही बोलबाला रहा. इसकी मांग के आगे सीमित मात्रा में आनेवाले देसी लहसुन को पूछनेवाले कम ही थे.
