मिटा भय, बढ़ी सुविधा, तो फिर करें वोट आधुनिकता के दौर में हाइटेक हुआ चुनाव तंत्र ढाई दशक में बदल गया चुनाव का नजरिया मिट गया मतदाताओं और पोलिंग पार्टियों का भय संवाददाता, गोपालगंजरविवार को जिले में लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है. मतदाता उत्साहित हैं. विभिन्न बूथों पर घूमने के बाद ऐसा लग रहा है मानों आधुनिकता के दौर में पूरा चुनाव तंत्र ही हाइटेक हो गया है. जब ढाई दशक पहले के चुनावों पर नजर दौड़ाते हैं, तो अब और तब में भारी बदलाव हुआ है. 90 के दशक में जो चुनाव हुआ उस दौर में बैलेट और बुलेट का बोल बाला था. बूथों पर सुविधा नाम की चीज नहीं थी. चुनावकर्मियों के सही सलामत घर लौटने के लिए परिवार वाले दुआ मांगते थे. कोई चुनाव कराने जाना नहीं चाहता था. मतदाता भी वोट देने से कतराते थे. कभी अपराधियों द्वारा बूथ की लूट एवं मतदानकर्मियों सहित मतदाताओं की पिटाई होती थी, तो कभी ग्रामीण पुलिस जवानों की लाठियों के शिकार होते थे. लेकिन, यह जमाना पीछे छूट गया है. सभी बूथों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गयी है. अब बैलेट नहीं इवीएम है. क्या कहते हैं पूर्व पीठासीन पदाधिकारी 80 के दशक में चुनाव कराना बड़ा भयावह लगता था. बूथों पर सुविधाओं का घोर अभाव क्या सुविधा होती ही नहीं थी. सुरक्षा भी नहीं थी. फिर भी लोग वोट करने अधिक संख्या में आते थे. अब तो सुविधा और सुरक्षा दोनों बढ़ा है. ऐसे में सभी को मतदान करना चाहिए. फोटो नं-25- जलेश्वर नाथ तिवारी क्या कहते हैंं युवा मतदानकर्मी मेरी ड्यूटी मतदान कार्य में है. बूथ पर पानी, बिजली, शौचालय की सुविधा है. कोई भय नहीं है. हम सभी कर्मी मतदाताओं के इंतजार में है कि वे और मतदान करें. बूथ पर सभी सुविधाएं हैं. फोटो नं-26- जयप्रकाश सिंह
मिटा भय, बढ़ी सुविधा, तो फिर करें वोट
मिटा भय, बढ़ी सुविधा, तो फिर करें वोट आधुनिकता के दौर में हाइटेक हुआ चुनाव तंत्र ढाई दशक में बदल गया चुनाव का नजरिया मिट गया मतदाताओं और पोलिंग पार्टियों का भय संवाददाता, गोपालगंजरविवार को जिले में लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है. मतदाता उत्साहित हैं. विभिन्न बूथों पर घूमने के बाद ऐसा लग […]
