भीतरघातियों के बढ़ते तादाद ने बिगाड़ा समीकरण

भीतरघातियों के बढ़ते तादाद ने बिगाड़ा समीकरण सभी दलों में नाराज कार्यकर्ताओं की है लंबी कतारमां सिंहासनी की बात कह कार्यकर्ताओं को मना रहे प्रत्याशीसंवाददाता, गोपालगंजभीतरघातियों से परेशान नेताजी, अब मां सिंहासनी की शरण में पहुंच चुके हैं. बात बनाने के लिए बात-बात में थावे मां सिंहासनी पर दावं चल रहे हैं, ताकि कार्यकर्ता पक्ष […]

भीतरघातियों के बढ़ते तादाद ने बिगाड़ा समीकरण सभी दलों में नाराज कार्यकर्ताओं की है लंबी कतारमां सिंहासनी की बात कह कार्यकर्ताओं को मना रहे प्रत्याशीसंवाददाता, गोपालगंजभीतरघातियों से परेशान नेताजी, अब मां सिंहासनी की शरण में पहुंच चुके हैं. बात बनाने के लिए बात-बात में थावे मां सिंहासनी पर दावं चल रहे हैं, ताकि कार्यकर्ता पक्ष में हो सकें. कार्यकर्ताओं से कहते हैं आप यह मत भूलिए कि मां देख रही हैं. आप कैसे कार्य कर रहे हैं, यह मां जान रही है. पार्टी के कार्यकर्ता हैं, पार्टी के लिए समर्पित रहिए. नेताजी डराते और मनाते भी हैं. कई प्रकार के तिकड़म भी लगाते हैं. गोपालगंज में तो स्थिति काफी रोचक है. पार्टी के कार्यकर्ता चुपके-चुपके दूसरे दल के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं. एक अलग टीम बन चुकी है, जो ऊपर से तो प्रचार पार्टी का कर रहा है, लेकिन गांव में पहुंच कर अपना अलग ही दावं चलते हैं. बात प्रत्याशी तक भी पहुंच चुकी है. लेकिन, वे शांत हैं. बोल कुछ नहीं रहे. कारण कहीं खेल गड़बड़ा न जाये. सभी दलों में हैं भीतरघातीजिले के छह विस क्षेत्रों में दलों में भीतरघातियों की संख्या बढ़ती जा रही है. कल तक पार्टी के प्रति समर्पित रहनेवाले की बोली बदल रही है. समर्थकों को विपरीत वोटिंग के लिए प्रेरित कर रहे हैं. शनिवार को थावे के रामचंद्रपुर गांव में प्रचार के दौरान एक पार्टी के कार्यकर्ता लोगों को अपने पक्ष में मतदान की बात कहने पहुंचे थे. सभी जमा हो गये, तो प्रत्याशी को जिताने की अपील की गयी. लेकिन, जाते-जाते कह गयेे कि मेरा काम था बताना, लेकिन कीजियेगा अपने मन से. स्थिति देख कर वोट डालियेगा. ऐसा न हो कि हम आये हैं, तो बात मान ही लिजियेगा. उनके जाते ही दूसरे दल के नेताजी आ धमके. जो एक कदम और आगे निकल गये. खुले रूप से कहा पार्टी ने गलत लोगों को टिकट दे दिया है. जनता जान रही है. जैसा इच्छा हो कीजियेगा. हम लोग तो पार्टी के प्रति काम करनेवाले हैं, जिसे टिकट मिलेगा उसी के प्रचार में घुमेंगे. विरोधी प्रचार टीम भी मैदान में जहां प्रत्याशी अब लोगों को रिझाने के लिए दिन-रात एक किये हुए हैं, वहीं दूसरी ओर नाराज लोग भी मैदान में हैं. कुछ तो खुल कर सामने आ चुके हैं, लेकिन कुछ पर्दें में रह कर प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं व पार्टी के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं. उनका कहना है कि आखिर हम लोगों को पार्टी क्या समझती है, जिसे टिकट दे देगी उसे ही साथ देंगे. हमलोगों का भी वजूद है. कब तक अंध भक्ति में जुटे रहेंगे. इन सबक के बीच मां सिंहासनी बस सभी तिकड़म को देख रही हैं.

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