गोपालगंज : स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ किरण कुमार लाल ने बुधवार को कालाजार प्रभावित गांव का जायजा लिया. बैकुंठपुर के सिंहासिनी गांव में एसपी स्प्रे छिड़काव का निरीक्षण करने के बाद सीएचसी की जांच की. बैकुंठपुर सीएचसी के बाद सिधवलिया में भी जांच की गयी.
अपर निदेशक की जांच में कई कर्मी गायब मिले, जबकि कुछ के रजिस्टर्ड में कमियां पायी गयी. उन्होंने कालाजार प्रभावित गांव में पीड़ित और उनके परिजनों से इलाज व दवा छिड़काव किये जाने की जानकारी ली. अपर निदेशक के साथ मलेरिया इंस्पेक्टर राजेश कुमार व केटी अशोक कुमार मौजूद थे.
वहीं देर शाम तक सदर अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ नंदकिशोर सिंह के साथ अपर निदेशक ने समीक्षा की. सिविल सर्जन ने बताया कि कालाजार को लेकर पीएचसी प्रभारियों को प्रतिदिन कालाजार प्रभावित गांव की मॉनीटरिंग करने को लेकर निर्देश दिया गया है.
घरों का सामान बाहर निकाल कराएं छिड़काव : अपर निदेशक डॉ किरण कुमार लाल ने घरों के कमरों के साथ ही पशुधन का निवास स्थल गोशालों में भी इसका छिड़काव करने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि कालाजार बीमारी अमूमन बालू मक्खी के काटने से ही होती है. यह मक्खी नमी वाली जगहों पर ज्यादा निवास करती हैं. साथ ही अंधेरे वाले स्थानों पर भी इसकी वास होती है. दीवारों के छिद्र में भी बालू मक्खी रहती हैं. उन्होंने बताया कि इस बार एसपी नामक दवा का स्प्रे किया जा रहा है. यह दवा बहुत ही कारगर होती है.
इसका असर काफी दिनों तक रहता है. इससे पहले डीडीटी का छिड़काव किया जाता था. पहली चुनौती बीमारी को शुरू में ही पहचानने और उपचार की है. कालाजार हल्के बुखार, कमजोरी और भूख की कमी से शुरू होता है तथा कई सप्ताह में तेज बुखार, एनिमिया, लीवर का बढ़ना, चिड़चिड़ापन, त्वचा का काला पड़ना, पेट फूलना, निर्बलता जैसे लक्षणों में बदल जाता है.
समुचित उपचार नहीं होने पर रोगी की मृत्यु संभावित हो जाती है. अधिकतर रोगी आम तौर पर एंटीबायोटिक लेने या मलेरिया के इलाज के फेर में बहुत खर्च कर देते हैं, लेकिन कालाजार के कारण हो रहे बुखार में ये उपचार कारगर नहीं होते.
