कुख्यात िवकास सिंह की हत्या के बाद गैंगवार की आशंका से पुलिस अलर्ट

भोरे : कुख्यात अपराधी सरगना मुन्ना मिश्रा के शार्प शूटर और दाहिना हाथ कहे जाने वाले विकास सिंह की हत्या के बाद अपराध जगत में खलबली मची है. हत्या के बाद गैंगवार की आशंका से पुलिस भी काफी सतर्क है. मुन्ना मिश्रा की अदावत गोपालगंज में एक बड़े अपराधी से है. मुन्ना मिश्रा लगातार उसके […]

भोरे : कुख्यात अपराधी सरगना मुन्ना मिश्रा के शार्प शूटर और दाहिना हाथ कहे जाने वाले विकास सिंह की हत्या के बाद अपराध जगत में खलबली मची है. हत्या के बाद गैंगवार की आशंका से पुलिस भी काफी सतर्क है. मुन्ना मिश्रा की अदावत गोपालगंज में एक बड़े अपराधी से है. मुन्ना मिश्रा लगातार उसके लोगों को निशाना बना रहा था.

इसके कारण मुन्ना मिश्रा और उसका पूरा गैंग निशाने पर था. पुलिस को लगातार चुनौती दे रहे मुन्ना मिश्रा गैंग के सबसे सक्रिय सदस्य विकास सिंह के मारे जाने के बाद पुलिस ने भी राहत की सांस ली है. कटेया में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर यह गैंग एक के बाद एक घटनाओं को अजाम दे रहा था. एक दशक पूर्व अपराध की दुनियां में कदम रखने वाला विकास सिंह देखते ही देखते बड़ा अपराधी बन बैठा था.

एक दशक पूर्व विकास पर दर्ज हुआ था पहला मामला : एक दशक पूर्व गांव के ही एक व्यक्ति को विकास ने सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया था कि उसके आने पर वह व्यक्ति बैठा रहा. हालांकि यह मामला पुलिस में आने से पूर्व ही संभाल लिया गया. उसके बाद विकास की ये रोजमर्रा की आदत बन गयीं. बड़े घर का बेटा होने के कारण उसके सितम को लोग सह रहे थे. वर्ष 2006 में वह मुन्ना मिश्रा के संपर्क में आया और लाइनर का काम करने लगा. मुन्ना मिश्रा को विकास की वजह से सफलता मिलती गयी. नतीजा यह हुआ कि विकास सिंह मुन्ना मिश्रा का सबसे खास आदमी बन बैठा.
बैंक मैनेजर की हत्या के बाद अपराध जगत में चर्चित हुआ था विकास सिंह :
23 अगस्त 2007 को कटेया थाना क्षेत्र के बगहीं बाजार में स्थित ग्रामीण बैंक के मैनेजर की अपराधियों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड में मुन्ना मिश्रा का नाम सामने आया था. यह हत्या अत्याधुनिक हथियार से की गयी थी. जिस सफेद रंग की यामहा गाड़ी से बैंक मैनेजर को गोली मारी गयी थी, वह विकास सिंह की थी. भोरे के तत्कालीन थानाध्यक्ष जेएन यादव ने घर से गाड़ी सहित विकास सिंह को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने कांड में शामिल सभी अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि मुन्ना मिश्रा पुलिस की गिरफ्त से बाहर था.
मुन्ना की गिरफ्तारी के बाद विकास ने संभाली थी कमान : वर्ष 2009 में अपराधी सरगना मुन्ना मिश्रा को मीरगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर महेश सिंह ने पटना में गिरफ्तार कर लिया. मुन्ना मिश्रा के जेल जाने के बाद विकास सिंह उसके इशारे पर काम करता रहा. मुन्ना मिश्रा के जेल से बाहर आने के बाद एक फिर गैंग सक्रिय हो गया. मुन्ना मिश्रा के एक इशारे पर वह किसी पर भी गोलियां बरसा देता था. नशे का आदि होने के कारण विकास सिंह पर से उसके ही लोगों ने भरोसा करना छोड़ दिया था.

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