कई सरकारी दफ्तरों में नहीं है शौचालय

हास्यास्पद. जिलावासियों के लिए फरमान, खुद व्यवस्था से है अनजान गोपालगंज : स्वच्छता अभियान की गूंज गांव की हर गलियों तक पहुंच चुकी है. समाज का हर तबका अपने-अपने घरों में शौचालय बनवा रहा है. हर ओर शौचालय के निर्माण से सर्वांगीण स्वच्छता का सपना शीघ्र ही पूरा होता दिख रहा है. लेकिन, अब भी […]

हास्यास्पद. जिलावासियों के लिए फरमान, खुद व्यवस्था से है अनजान

गोपालगंज : स्वच्छता अभियान की गूंज गांव की हर गलियों तक पहुंच चुकी है. समाज का हर तबका अपने-अपने घरों में शौचालय बनवा रहा है. हर ओर शौचालय के निर्माण से सर्वांगीण स्वच्छता का सपना शीघ्र ही पूरा होता दिख रहा है. लेकिन, अब भी जिले के कई सरकारी दफ्तरों को शौचालय का इंतजार है. इन दफ्तरों में अब तक शौचालय की सुविधा नहीं है.
ऐसे में जहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में शौचालय का निर्माण हो रहा है, वहीं शौचालय से वंचित इन सरकारी दफ्तरों तक जागरूकता की गूंज नहीं पहुंच सकी है. नतीजा यह है कि अब भी सरकारी दफ्तरों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है. यह हाल जिला मुख्यालय के सिनेमा रोड स्थित शिक्षा विभाग का ही नहीं, बल्कि कई कार्यालय शौचालय विहीन है. इन कार्यालयों में कार्यरत महिला और पुरुष कर्मी कौन कहे पदाधिकारियों को भी शौचालय की कमी से परेशानियों से जूझना पड़ता है.
वहीं, शिक्षा विभाग में प्रत्येक दिन आनेवाले शिक्षक और शिक्षिकाओं को भी शौचालय की कमी खलती रहती है. लेकिन, आज तक विभाग के अधिकारी शौचालय की जरूरत नहीं समझ सके. वहीं, महिला कर्मी भी अपनी व्यथा आखिर किससे बयां करें, जब अधिकारियों को शौचालय की जरूरत महसूस ही नहीं होती.
शौचालय सुविधा से वंचित हैं मासूम
क्या कहते हैं अधिकारी
सरकारी कार्यालयों में शौचालय निर्माण की जिम्मेवारी जिला प्रशासन को नहीं है. कार्यालय प्रधान विभागीय राशि से कार्यालय में शौचालय का निर्माण करा सकते हैं.
धनंजय कुमार, निदेशक, डीआरडीए, गोपालगंज
करोड़ों की लागत से बना भवन,शौचालय नदारद : नगर पर्षद का नवनिर्मित कार्यालय भले ही तीन करोड़ की लागत से बना है. लेकिन, इस कार्यालय में भी शौचालय की सुविधा नहीं है. उद्घाटन के छह माह पूरे होने को हैं. फिर भी इस कार्यालय को शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं हो रही है.
शौचालय की सुविधा से मासूमों को भी वंचित रखा गया है. जिले के अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय नहीं है. इसके कारण मासूम बच्चों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं.
जिला पुस्तकालय व परियोजना कार्यालय में नहीं है शौचालय
केंद्रीय जिला पुस्तकालय में हर दिन समाज के प्रबुद्ध, विद्वान एवं समाजसेवी महिला-पुरुष पुस्तकों के अध्ययन के लिए पहुंचते हैं. लेकिन, यहां भी शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है. आनेवाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सबसे बड़ी समस्या तो महिला कर्मियों को है.
सदर प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में भी शौचालय नहीं है, जबकि परियोजना कार्यालय के अधिकतर कर्मी महिलाएं है. फिर भी शौचालय की सुविधा से वंचित रखा गया है. ऐसे में संपूर्ण स्वच्छता का सपना आखिर कैसे पूरा होगा.

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