दबंग नेताओं में गिने जाते थे कृष्णा शाही

हथुआ : भाजपा नेता कृष्णा शाही के गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है. घर में परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. घटना की खबर सुन कर लोग घटनास्थल फुलवरिया थाने के बसवरिया माझा गांव पहुंचे. परिजन शाही की मौत के बाद उभर नहीं पा रहे हैं. कृष्णा शाही तीन भाइयों में सबसे छोटे भाई […]

हथुआ : भाजपा नेता कृष्णा शाही के गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है. घर में परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. घटना की खबर सुन कर लोग घटनास्थल फुलवरिया थाने के बसवरिया माझा गांव पहुंचे. परिजन शाही की मौत के बाद उभर नहीं पा रहे हैं. कृष्णा शाही तीन भाइयों में सबसे छोटे भाई थे, जबकि बड़े भाई दिनेश शाही स्वास्थ्य विभाग में एनजीओ से कार्यरत हैं. मंझले भाई पूर्व मुखिया रह चुके हैं. मां एएनएम हैं. कृष्णा शाही की समाज में अच्छी पकड़ थी.
लोजपा से राजनीतिक कैरियर की हुई थी शुरुआत : हथुआ. वर्ष 2000 से राजनीतिक कैरियर शुरू करनेवाले कृष्णा शाही जिले के दबंग नेताओं में िगने जाते थे.
उन्होंने पहली बार िनदर्लीय चुनाव लड़ा. इसमें सफलता नहीं िमली. 2005 में बसपा में शामिल हो गये. 2010 में हथुआ विधानसभा क्षेत्र से बसपा के िटकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गये. 2006 में उन्होंने गृह पंचायत चैनपुर से अपने मंझले भाई उमेश शाही को मुखिया पद में जीत हासिल दिलायी. वहीं 2006 में अपनी राजनीतिक कैरियर उठा-पटक देख पार्टी छोड़ दिया और भारतीय जनशक्ति पार्टी में शामिल हो गये.
पार्टी ने उन्हें व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी बनाया, लेकिन 2015 तक अपने पद पर रहने के बाद वे भाजपा में शामिल हुए और 2015 में विधानसभा चुनाव की तैयारी में लग गये. हम पार्टी से महाचंद्र सिंह के चुनाव लड़ने के कारण उन्होंने उनका समर्थन किया. 2016 में अपनी गृह पंचायत चैनपुर में मुखिया पद महिला सीट होने के कारण अपनी पत्नी शांता शाही को जीत दिलायी.
हथुआ में भी पुलिस की रही चौकसी : भाजपा नेता की रहस्यमय ढंग से हुई मौत के बाद सभी चौक-चौराहों पर पुलिस की तैनाती की गयी है. कृष्णा शाही के गांव चैनपुर में भी पुलिस बल तैनात थे. पेउली, बड़कागांव, हथुआ, चैनपुर में पुलिस बल की तैनाती की गयी है.
पटना से रवाना हुईं शांता शाही
पटना में रह रही उनकी पत्नी व चैनपुर की मुखिया शांता शाही बुधवार की चार बजे शाम को गांव के लिए रवाना हो गयी है. घटना के बारे में मृतक की पत्नी को जानकारी नहीं दी गयी है. उन्हें जरूरी काम के लिए घर पर आने के लिए बुलाया गया है. शांता शाही अपनी एक बेटा और एक बेटी की पढ़ाई को लेकर पटना में रह रही थी.

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