ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा नहीं हो पायी है उपलब्ध

ग्रामीण इलाके पूरी तरह नकदी पर निर्भर दुकानदार ऑनलाइन पेमेंट लेने से कतरा रहे गोपालगंज. नोटबंदी के आठ महीने हो गये, लेकिन नकदी संकट से लोगों को राहत नहीं मिली. नोट के संकट से बैंक व उपभोक्ता दोनों परेशान हैं. हालांकि शुरू से ही बैंकों द्वारा लोगों को कैशलेस के लिए प्रेरित करने का अभियान […]

ग्रामीण इलाके पूरी तरह नकदी पर निर्भर
दुकानदार ऑनलाइन पेमेंट लेने से कतरा रहे
गोपालगंज. नोटबंदी के आठ महीने हो गये, लेकिन नकदी संकट से लोगों को राहत नहीं मिली. नोट के संकट से बैंक व उपभोक्ता दोनों परेशान हैं. हालांकि शुरू से ही बैंकों द्वारा लोगों को कैशलेस के लिए प्रेरित करने का अभियान चलाया जा रहा है. बावजूद इसके ग्रामीण इलाके पूरी तरह नकदी पर निर्भर हैं. शहरों में भी 10 प्रतिशत से ज्यादा दुकानों पर कार्ड या ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पायी है. खासकर रोजमर्रा की जरूरतें- दूध, सब्जी, किराना की ज्यादातर दुकानें नकदी पर निर्भर हैं. दुकानदार भी ऑनलाइन कैश लेने से इनकार कर रहे हैं. इसके कारण कैशलेस को गति नहीं मिल रही.
मार्च के बाद आरबीआइ ने रोका हाथ : नोटबंदी के बाद तीन माह तक नकदी का जबरदस्त संकट रहा. फरवरी से आरबीआइ द्वारा बैंकों को पर्याप्त रुपये भेजे जाने लगे, साथ ही आरबीआइ ने निकासी की लिमिट भी हटा दी. जिसने जितना चाहा, रुपये निकाले, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही मार्च के बाद आरबीआइ ने पुन: अपने हाथ खींच लिये और बैंक की मांग दो हजार करोड़ होती थी, तो आरबीआइ सौ करोड़ भेजता था. चुनाव के बाद से अब तक आरबीआइ ने पांच सौ करोड़ से ज्यादा नहीं दिये. ऐसे में नकदी संकट पुन: गहरा गया.
एटीएम खाली : नोटबंदी के बाद से ही बैंकों का खजाना लगभग खाली हो गया है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव एटीएम पर पड़ा है. शहर की ज्यादातर एटीएम में रुपये नहीं हैं, जिसमें रुपये डाले भी जा रहे हैं, तो दो घंटे बाद खत्म हो जाते हैं. एसबीआइ की डाकघर चौक रोड स्थित एटीएम , बंजारी में एचडीएफसी , केनरा बैंक की एटीएम ही लगातार चल रही हैं. छुट्टी के दिन उनका भी कोई भरोसा नहीं. ग्रामीण क्षेत्रों में न तो एटीएम में रुपये हैं न और ही शाखाओं में. इसलिए वहां के लोग इस उम्मीद में शहर आते हैं कि रुपये मिल जायेंगे, लेकिन कभी-कभी उन्हें यहां भी निराशा ही हाथ लगती है.
चाहिए स्वाइप मशीन तो करें आवेदन : हमारे पास स्वाइप मशीन की कोई कमी नहीं है, जिसको जरूरत है, आवेदन करे, एक सप्ताह के अंदर स्वाइप मशीन लगा दी जायेगी. इसके लिए जगह-जगह कैंप लगाकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है. ज्यादातर बड़ी दुकानों पर मशीनें लगा भी दी गयी हैं. छोटे दुकानदारों को भी इसका महत्व समझना चाहिए और अपनी दुकान पर इसे लगवाना चाहिए, मशीन की कीमत भी नहीं लगती है, केवल मासिक किराया देना होता है, वह भी न्यूनतम 250 रुपये है.
राजन कुमार, प्रबंधक,लीड़ बैंक, गोपालगंज

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