Gopalganj Police Station Extortion Racket : गोपालगंज पुलिस ने अपने ही पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 1.30 लाख रुपये की रिश्वत लेने और पांच लोगों को करीब 36 घंटे तक गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के आरोप में यादोपुर थाने के SHO सह सब-इंस्पेक्टर अनिल राम समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में कथित बिचौलिया राजू यादव, स्टेशन ड्राइवर राकेश कुमार और चौकीदार महंत कुमार यादव शामिल हैं. हिरासत में लिए गए पांच लोगों में एक नाबालिग भी शामिल था. गोपालगंज के SP विनय तिवारी ने मामले की जानकारी मिलने के बाद इसकी जांच का निर्देश दिया था. जांच रिपोर्ट के आधार पर SHO समेत चारों आरोपियों की गिरफ्तारी की गई.
16 अगस्त को मिली थी गुप्त सूचना
SP विनय तिवारी ने ‘प्रभात खबर’ से बातचीत में बताया कि 16 अगस्त को उन्हें इस मामले की गुप्त सूचना मिली थी. इसके बाद DSP (मुख्यालय) को पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया. जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की गई. DSP ने 18 अगस्त को अपनी जांच रिपोर्ट SP को सौंपी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई.
गांजा रखने के शक में थाने लाए गए थे पांच लोग
SP विनय तिवारी के मुताबिक, 8 जुलाई को यादोपुर इलाके में पुलिस टीम ने गांजा रखने के आरोप में छापेमारी की थी. इसी दौरान एक महिला, उसकी नाबालिग बेटी और बेतिया से मवेशी खरीदने आए तीन पुरुषों को भी पुलिस थाने ले आई. इन पांचों पर कथित तौर पर ड्रग्स कारोबार से जुड़े होने का शक था. जांच में सामने आया कि पूछताछ के बाद इन पांचों का गांजा मामले से कोई सीधा संबंध नहीं मिला. इसके बावजूद उन्हें बिना FIR दर्ज किए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के करीब 36 घंटे तक थाने में रखा गया. पुलिस के अनुसार, उनकी हिरासत से संबंधित कोई एंट्री स्टेशन डायरी में भी नहीं की गई थी.
छोड़ने के बदले 1.30 लाख रुपये लेने का आरोप
जांच में पुलिस को कथित जबरन वसूली के भी गंभीर साक्ष्य मिले हैं. आरोप है कि हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बदले उनसे पैसे की मांग की गई और उन्हें धमकाया गया. पुलिस के अनुसार, महिला और उसकी नाबालिग बेटी को छोड़ने के लिए कथित तौर पर चौकीदार महंत यादव के जरिए 75 हजार रुपये लिए गए. एक अन्य व्यक्ति को मामले से बाहर रखने के लिए 55 हजार रुपये लेने का आरोप है. इस तरह कुल 1.30 लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामला सामने आया है.
CCTV और मोबाइल से मिले अहम साक्ष्य
जांच के दौरान पुलिस ने थाने के CCTV फुटेज की भी पड़ताल की. इसमें पांचों लोगों के 8 और 9 जुलाई के बीच करीब 36 घंटे तक थाने में मौजूद रहने की पुष्टि हुई. मोबाइल फोन से मिले साक्ष्यों में तत्कालीन SHO अनिल राम और कथित बिचौलिए के बीच बार-बार बातचीत होने की बात सामने आई. जांच में यह भी पता चला कि बिचौलियों और चौकीदारों के जरिए मामले से जुड़े गवाहों को कथित तौर पर डराने-धमकाने और प्रभावित करने की कोशिश की गई.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस
जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया. SP के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. अनिल राम और चौकीदार महंत कुमार यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मामले में आगे की जांच जारी है.
Also Read : गोपालगंज एसपी को पटना हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, केस डायरी नहीं भेजने पर 9 सितंबर को किया तलब
