Magadh university Urdu's role in freedom struggle: मगध विश्वविद्यालय के पीजी उर्दू विभाग के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू की भूमिका’ विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उर्दू भाषा, साहित्य और पत्रकारिता द्वारा राष्ट्रीय चेतना जागृत करने, जनता को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने तथा राष्ट्रीय एकता एवं आपसी भाईचारे को मजबूत करने में निभायी गयी भूमिका को रेखांकित किया.
मुख्य अतिथि बिहार सरकार के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक, उर्दू साहित्यकार एवं चिंतक सैयद मासूम अजीज काजमी ने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान है. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उर्दू ने जनता में राजनीतिक चेतना जागृत करने और आजादी की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
उन्होंने कहा कि उर्दू के समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, शायरों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं एवं लेखों के माध्यम से अंग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना पैदा की तथा आम जनता को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया. उर्दू साहित्य ने लोगों के दिलों में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को प्रबल बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया.
स्वतंत्रता संग्राम साझा राष्ट्रीय संघर्ष था : प्रो. कृष्णदेव वर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मगध विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. कृष्णदेव वर्मा ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम एक साझा राष्ट्रीय संघर्ष था, जिसमें विभिन्न भाषाओं, धर्मों और वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर भाग लिया.
उन्होंने कहा कि उर्दू ने इस संघर्ष में संपर्क भाषा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और स्वतंत्रता का संदेश व्यापक स्तर पर जनता तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनी. नयी पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इस साझा इतिहास और उसमें उर्दू के योगदान से अवगत कराना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है.
स्वतंत्रता आंदोलन का संदेश जनता तक पहुंचाने में उर्दू पत्रकारिता की अहम भूमिका
मुख्य वक्ता एसएन सिन्हा कॉलेज, टिकारी के राजनीति विज्ञान विभाग के शिक्षक, उर्दू साहित्यकार एवं स्तंभकार डॉ अभय कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के संदेश को जनता तक पहुंचाने में उर्दू पत्रकारिता ने असाधारण भूमिका निभायी.
उन्होंने कहा कि अनेक उर्दू समाचार-पत्रों और पत्रकारिता संस्थानों ने अंग्रेजी सरकार की पाबंदियों, दबाव और कठोर कार्रवाइयों के बावजूद स्वतंत्रता, स्वाधीनता और राष्ट्रीय एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया. उर्दू के शायरों और साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से गुलामी के विरुद्ध भावनाओं को मजबूत किया तथा राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. डॉ अभय कुमार ने कहा कि उर्दू भाषा और पत्रकारिता के योगदान के उल्लेख के बिना स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अधूरा है.
गंगा-जमुनी तहजीब और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर जोर
इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. जावेद अंजुम, संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर प्रसाद, मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक प्रो. असदुल्लाह सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए.
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उर्दू भाषा, साहित्य और पत्रकारिता की सेवाओं का विशेष स्थान है. उर्दू के शायरों, साहित्यकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने अपनी लेखनी के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना पैदा करने और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया.
वक्ताओं ने उर्दू की उस ऐतिहासिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिसके माध्यम से भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे को मजबूती मिली. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उर्दू पत्रकारिता ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की नीतियों की आलोचना करने के साथ-साथ जनता को अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने के प्रति जागरूक किया.
उर्दू ने स्वतंत्रता की मशाल जलाने में अग्रणी भूमिका निभायी : डॉ अब्दुल हई
कार्यक्रम के आरंभ में पीजी उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ अब्दुल हई ने अतिथियों को शॉल एवं पौधे भेंट कर सम्मानित किया. स्वागत भाषण में उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य और विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का इतिहास इस बात का गवाह है कि उर्दू भाषा ने कविता और गद्य दोनों माध्यमों से स्वतंत्रता की मशाल जलाने में अग्रणी भूमिका निभायी. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नयी पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन में उर्दू के योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है.
छात्राओं ने प्रस्तुत कीं देशभक्ति से ओत-प्रोत कविताएं
कार्यक्रम के दौरान उर्दू विभाग की छात्राओं नेहा नाज, नूर अफशां और लईका फातिमा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति से ओत-प्रोत कविताएं प्रस्तुत कीं.
कार्यक्रम का संचालन उर्दू विभाग की शिक्षिका डॉ समी इकबाल ने किया, जबकि डॉ तरन्नुम जहां ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. इस अवसर पर हिंदी विभाग की डॉ अम्बे कुमारी, डॉ परम प्रकाश, डॉ राकेश कुमार रंजन एवं डॉ अनुज कुमार तरुण, अंग्रेजी विभाग की डॉ इफ्त शाहीन, फारसी विभाग के डॉ मुमताज अहमद, संस्कृत विभाग के प्रो. मुनेश्वर प्रसाद एवं डॉ एकता वर्मा, दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. जावेद अंजुम एवं डॉ प्रियंका तिवारी, मिर्जा गालिब कॉलेज के उर्दू शिक्षक डॉ एहसानुल्लाह दानिश तथा लीगल सेक्शन के ओबैद जहीर सहित उर्दू विभाग के सभी शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की प्रस्तुति के साथ हुआ.
