गया के शेरघाटी में जन कल्याण शिविर के पहले दिन हंगामा, अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भड़के लोग

Gaya News: गया के शेरघाटी प्रखंड परिसर में तीन दिवसीय 'जन कल्याण सह सहयोग शिविर' के पहले दिन अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई. शिविर में वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. कई पेंशनधारियों ने महीनों से पेंशन बंद होने की शिकायत की. अधिकांश स्टॉलों पर अधिकारियों की जगह कर्मी या डेटा ऑपरेटर ही मौजूद मिले.

शेरघाटी से नवीन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
Gaya News : गया जिले के शेरघाटी प्रखंड परिसर में तीन दिवसीय (16, 17 और 18 जून) प्रखंड जन कल्याण सह सहयोग शिविर की शुरुआत हो गई है. हालांकि, शिविर के पहले दिन ही विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में शिथिलता और जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली. शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित अपनी गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं.

बीडीओ ने गिनाए शिविर के फायदे, प्रचार-प्रसार की अपील की

मामले को लेकर शेरघाटी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) स्नेहिल आनंद ने बताया कि इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी और उनका सीधा लाभ उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण यहां आकर योजनाओं के संबंध में पूछताछ करने, नया आवेदन जमा करने, स्वास्थ्य जांच कराने, छात्रवृत्ति और स्वरोजगार योजनाओं में आवेदन करने सहित आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड निर्माण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं. बीडीओ ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से इस शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की अपील भी की ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंच सके.

महीनों से बंद है बुजुर्गों की पेंशन, समाधान की लगाई गुहार

शिविर में अपनी फरियाद लेकर पहुंची माहुआडीह गांव की बुधनी देवी, बेचनी देवी और नूतननगर की गीता देवी और देवन्ती देवी ने नाराजगी जाहीर करते हुए अपनी परेशानी साझा की. महिला लाभार्थियों ने बताया कि किसी की वृद्धावस्था पेंशन पिछले दो महीने से तो किसी की छह महीने से बिना किसी कारण के बंद पड़ी है. कार्यालयों के चक्कर काट कर थक चुके इन बुजुर्गों ने शिविर के माध्यम से अपनी पेंशन योजना का शीघ्र समाधान कराने की पुरजोर मांग की.

अधिकारियों की जगह डेटा ऑपरेटरों के भरोसे रहे स्टॉल

शिविर की जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो यहाँ प्रशासनिक दावों के विपरीत व्यवस्था देखने को मिली. महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कैंप में कोई भी जिम्मेदार चिकित्सक (डॉक्टर) मौजूद नहीं थे. वहाँ तैनात एएनएम द्वारा ही जैसे-तैसे लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां बांटी जा रही थीं. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के स्टॉल पर केवल सुपरवाइजर राजकुमार उपस्थित रहकर लोगों की समस्याएं सुन रहे थे, जबकि विभाग के संबंधित उच्च अधिकारी नदारद थे.

इसी प्रकार बाल विकास परियोजना (ICDS), शिक्षा विभाग, पथ निर्माण विभाग, कृषि विभाग और आपूर्ति विभाग के काउंटरों पर भी अधिकांश स्थानों पर मुख्य पदाधिकारियों के बजाय केवल डेटा ऑपरेटर और कनिष्ठ कर्मी ही कुर्सियों पर मौजूद दिखे.

ग्रामीणों का आरोप: समस्याओं के समाधान की जगह होती है सिर्फ कागजी खानापूर्ति

दूर-दराज के गांवों से अपनी गंभीर समस्याएं लेकर शिविर में पहुंचीं महिलाओं, दिव्यांगों और वृद्धजनों ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयोजित इन शिविरों में अक्सर बड़े अधिकारी खुद अनुपस्थित रहते हैं. उनके अधीनस्थ सहयोगी कर्मी यहां केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने और आवेदन जमा करने की खानापूर्ति करते हैं, जबकि बाद में उन समस्याओं का कोई वास्तविक समाधान नहीं हो पाता है. अधिकारियों के इस उदासीन रवैये के कारण भीषण गर्मी में प्रखंड मुख्यालय पहुंचे वृद्धों और ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

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Published by: Suryakant Kumar

सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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