30 जुलाई से शुरू होगा सावन, गयाजी के शिवालयों में उमड़ेगी आस्था की भीड़, तैयारियां तेज

सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, और गया के शिवालयों में तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।

Gayaji News : भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन इस बार 30 जुलाई से शुरू हो रहा है. सावन को लेकर गया शहर के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां तेज हो गई हैं. मंदिर प्रबंधन समितियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की ओर से मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट का काम युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है.

सावन में हर दिन शिवालयों में होगी विशेष पूजा

सावन महीने में श्रद्धालु अपने नजदीकी शिवालयों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं. सावन की सभी तिथियों पर भगवान शिव की विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है. वहीं प्रत्येक सोमवारी को शिव मंदिरों में विशेष श्रृंगार, पूजन और आरती होती है.

मार्कण्डेय महादेव मंदिर में उमड़ती है हजारों की भीड़

गया के प्रसिद्ध मार्कण्डेय महादेव मंदिर सहित कई प्रमुख शिवालयों में सावन की सोमवारी पर श्रद्धालुओं की संख्या हजारों तक पहुंच जाती है. श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर समितियों की ओर से कार्यकर्ताओं की तैनाती की जाती है. भीड़ नियंत्रण के लिए कई मंदिरों में पुलिस प्रशासन का भी सहयोग लिया जाता है.

इन शिवालयों में जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़

सावन महीने में गया शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इनमें माड़नपुर स्थित परमपिता वृद्ध पिता महेश्वर शिव मंदिर, बायपास स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर, मार्कण्डेय महादेव मंदिर, ब्राह्मणी घाट स्थित बाबा फलकेश्वर नाथ महादेव मंदिर, आदि पितामहेश्वर महादेव मंदिर, रामशिला स्थित स्फटिक शिव मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, महादेव घाट शिवालय और टिकारी रोड स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर प्रमुख हैं.

गया में चार पीढ़ियों के शिव स्वरूपों की होती है पूजा

धार्मिक और पौराणिक नगरी गया जी में भगवान शंकर की चार पीढ़ियों के स्वरूपों की पूजा की जाती है. यहां वृद्ध परपिता महेश्वर, परमपिता महेश्वर, परपिता महेश्वर और आदि पितामहेश्वर के अलग-अलग मंदिर स्थित हैं. जानकारों के अनुसार ब्रह्म कल्पित आदि पितामहेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप विराजमान है, जो देश में दुर्लभ माना जाता है.

बाबा फलकेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना गयासुर ने की थी

फल्गु नदी के पश्चिमी तट स्थित ब्राह्मणी घाट पर बाबा फलकेश्वर नाथ महादेव मंदिर स्थित है. मंदिर के पुजारी मनोज मिश्र के अनुसार सतयुग काल में गयासुर ने सूर्य मंदिर के साथ इस मंदिर की स्थापना की थी. सालों भर यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सावन में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है.

वृद्ध परमपिता महेश्वर मंदिर में मणिधारी सांप की मान्यता

अक्षयवट के समीप स्थित वृद्ध परमपिता महेश्वर मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है. मंदिर के पुजारी भोला पांडेय के अनुसार इस मंदिर की स्थापना ब्रह्मा जी द्वारा की गई थी. मान्यता है कि यहां मणिधारी सांप का वास है, जिसका दर्शन श्रद्धालुओं को केवल महाशिवरात्रि के दिन होता है.

मार्कण्डेय ऋषि ने की थी मार्कण्डेय महादेव मंदिर की स्थापना

शहर के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं मार्कण्डेय ऋषि ने की थी. मंदिर के पुजारी पंडित प्रमोद गिरि के अनुसार संतान प्राप्ति और लंबी आयु की कामना को लेकर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं. महामृत्युंजय मंत्र के जाप के लिए भी दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं.

रामशिला पहाड़ की चोटी पर स्थित है पातालेश्वर महादेव मंदिर

इतिहासकारों के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने गया आगमन के दौरान रामकुंड का निर्माण कर पिंडदान किया था. इसके बाद रामशिला पर्वत पर भगवान शिव का आवाह्न कर पातालेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की थी. तभी से यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

सावन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था पर रहेगा जोर

सावन के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियां व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटी हैं. साफ-सफाई, पेयजल, प्रसाद वितरण और भीड़ नियंत्रण को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है, ताकि भक्तों को पूजा-अर्चना में किसी तरह की परेशानी न हो.


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Author: Niraj kumar

Published by: Vivek Singh

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