Chaturmas 2026 : सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है. इस वर्ष 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है, जो 19 नवंबर तक चलेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस चार महीने की अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ संस्कार सहित सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है.
भगवान विष्णु चार महीने के लिए जाते हैं योगनिद्रा में
विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य लाल भूषण मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. इस चार महीने की अवधि को ही चातुर्मास कहा जाता है. भगवान के निद्रा में होने के कारण ही इस दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.
20 नवंबर को देवउठनी एकादशी से फिर शुरू होंगे शुभ कार्य
चातुर्मास की समाप्ति 19 नवंबर को होगी. इसके अगले दिन, यानी 20 नवंबर को देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की लंबी योगनिद्रा से जागते हैं और इसके साथ ही एक बार फिर से सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है.
21 नवंबर को होगा तुलसी विवाह, बजेगी शहनाई
आचार्य लाल भूषण मिश्र ने आगे बताया कि देवउठनी एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन 21 नवंबर को किया जाएगा. इसी दिन रात्रि 3:41 बजे विवाह नक्षत्र में 'तुलसी विवाह' का अति शुभ मुहूर्त बन रहा है. शालिग्राम और माता तुलसी के विवाह के संपन्न होने के साथ ही शादियों का सीजन फिर से शुरू हो जाएगा और मांगलिक कार्य दोबारा पूरे हर्षोल्लास के साथ आरंभ हो जाएंगे.
क्या है चातुर्मास?
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से चातुर्मास की शुरुआत होती है और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) पर इसका समापन होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं. इसी कारण नए शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है.
4 महीने तक क्यों नहीं गूंजेगी शहनाई
चातुर्मास के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार देवताओं के शयन काल में ऐसे कार्य नहीं किए जाते हैं. देवउठनी एकादशी के बाद ही दोबारा विवाह और अन्य शुभ कार्य शुरू होते हैं.
चातुर्मास में क्या करें ?
चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की नियमित पूजा करें. व्रत, जप, तप, दान और सत्संग में समय दें. श्रीमद्भागवत, भगवद्गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है. जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है.
चातुर्मास में क्या नहीं करें ?
चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तामसिक भोजन, नशा, क्रोध, झूठ और किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए. इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने और संयम का पालन करने की सलाह दी जाती है.
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