गया जी में ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज पर भड़का पंडा समाज: ₹51 हजार तक के पैकेज पर विरोध, कोर्ट जाने की दी चेतावनी

Gaya Ji online Pind Daan controversy: गया जी में पितृपक्ष मेले से पहले ऑनलाइन पिंडदान और कर्मकांड के नाम पर टूरिज्म पैकेज बेचे जाने का विवाद गहरा गया है. पंडा समाज ने इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताते हुए व्यावसायिक कारोबार न बनने देने की चेतावनी दी है.

Gaya Ji online Pind Daan controversy: विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू होने से ठीक पहले ऑनलाइन पिंडदान और कर्मकांड के नाम पर बेचे जा रहे टूरिज्म पैकेजों को लेकर विवाद गहरा गया है. बुधवार को गयापाल समाज एवं 14 सैया गयापाल समिति ने संयुक्त रूप से एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित कर इस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. पंडा समाज ने स्पष्ट कहा कि पितृ मुक्ति का पावन कर्मकांड सनातन परंपरा और शास्त्रीय विधान से जुड़ा विषय है, इसे किसी भी स्थिति में व्यावसायिक कारोबार नहीं बनने दिया जाएगा.

ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज के खिलाफ पंडा समाज का मोर्चा, कहा- श्रद्धा के कर्मकांड को कारोबार न बनाएं | Prabhat Khabar Network

घर बैठे पिंडदान का कोई शास्त्रीय विधान नहीं

समिति के संरक्षक महेश लाल गुप्त ने निजी वेबसाइटों, होटलों और पर्यटन विभाग के प्रस्तावित पैकेजों पर कड़ा ऐतराज जताया:

  • शास्त्रसम्मत उपस्थिति अनिवार्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि गया जी में पिंडदान के लिए श्रद्धालु (पिंडदानी) का स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य है. घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान संपन्न कराने की शास्त्रों में कोई व्यवस्था नहीं है.
  • मनमाने पैकेज पर ऐतराज: आरोप लगाया गया कि निजी संस्थाओं और वेबसाइटों द्वारा श्रद्धालुओं से 25 हजार से लेकर 51 हजार रुपये तक के पैकेज वसूले जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है.
  • धार्मिक भावना से खिलवाड़: धार्मिक अनुष्ठान को पर्यटन पैकेज का रूप देने से इसकी मूल आस्था, पवित्रता और मर्यादा नष्ट होगी.
ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज के खिलाफ पंडा समाज का मोर्चा, कहा- श्रद्धा के कर्मकांड को कारोबार न बनाएं | Prabhat Khabar Network

पारंपरिक वेदियों और बही-खाता व्यवस्था पर खतरा

प्रेस वार्ता के दौरान गयापाल पुरोहितों ने तीर्थयात्रियों के पारिवारिक इतिहास और वेदियों के महत्व को रेखांकित किया.

"गयापाल पुरोहित पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के कुल बही-खाते संभालते आ रहे हैं, जहां कई परिवारों की सात से दस पीढ़ियों तक के प्रामाणिक रिकॉर्ड मौजूद हैं. होटल या अन्य स्थानों पर पिंडदान कराने से हमारी पारंपरिक 54 वेदियों और पुरोहित परिवारों की ऐतिहासिक भूमिका पर सीधा प्रहार होगा. यदि इस व्यावसायिक व्यवस्था पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो समाज इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगा और न्यायालय में रिट याचिका दायर करेगा." — राजेंद्र सिजुआर एवं महेश लाल गुप्त, गयापाल पंडा समाज

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By संजीव कुमार सिन्हा

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