गया OTA में 254 कैडेट्स की पासिंग आउट परेड, सेना के प्रशिक्षण में AI-ड्रोन और रोबोटिक्स शामिल

गया OTA में सेना की ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव आया है. अब कैडेट्स को AI, ड्रोन, साइबर और रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है. 5 सितंबर को 254 कैडेट्स पास आउट हो रहे हैं, जो भविष्य की मल्टी-डोमेन लड़ाइयों के लिए तैयार होंगे.

ओटीए गया के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल संदीप सिंह ने कहा कि शुरुआत में ओटीए में दो तरह के प्रशिक्षण की व्यवस्था थी- टीइएस व एससीओ. वर्ष 2024 में इसका स्वरूप बदल गया और अब शॉर्ट सर्विस कमीशन (तकनीकी) के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

हमारा उद्देश्य है कि हर वर्ष बीटेक किये 750 छात्रों को शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए प्रशिक्षित किया जाये. उन्होंने कहा कि इस वर्ष पांच सितंबर को चौथे शॉर्ट सर्विस कोर्स के कैडेट्स पासआउट हो रहे हैं.

पांच सितंबर को 254 कैडेट्स होंगे पास आउट

उन्होंने बताया कि पांच सितंबर को कुल 254 कैडेट्स पास आउट हो रहे हैं. इनमें 219 पुरुष व 35 महिला कैडेट्स पास आउट हो रहे हैं.

इस वर्ष इंजीनियर में 51, इमइ (इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियर) 44, सिग्नल्स में 31, इंफैंट्री में 32 पुरुष अफसर कमीशन प्राप्त करेंगे. 35 महिला अफसरों में इमइ व सिग्नल में सबसे अधिक जा रही हैं, बाकी कुछ इंफैंट्री व इंजीनियर में भी जा रही हैं.

पासिंग आउट परेड के दिन स्वार्ड ऑफ ऑनर, गोल्ड, सिल्वर व ब्रांज मेडल के अवार्ड बेहतर परफॉर्म करनेवाले कैडेट्स को दिये जायेंगे. बेहतर कंपनी को चैंपियनशिप बैनर प्रदान किया जायेगा.

कमांडेंट ने बताया कि इस बार पासिंग आउट परेड के मुख्य अतिथि व निरीक्षी अधिकारी वियतनाम पिपुल्स आर्मी के डिप्युटी चीफ ऑफ द जेनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल ले वेन हूंग होंगे, जो उन्हें सम्मानित करेंगे. इनके अलावा चीफ गेस्ट जीओसीसी सर्दन आर्मी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर भी मौजूद होंगे.

एआई, ड्रोन, साइबर और रोबोटिक्स से लैस हो रहे हैं कैडेट्स

ओटीए की ट्रेनिंग, यहां का प्रशिक्षण, शारीरिक, मानसिक, नैतिक, नेतृत्विक इन सब पर प्रभाव डालता है. आगे की लड़ाई तकनीकी एडवांसमेंट पर ज्यादा निर्भर रहेगी, इसलिए तकनीकी प्रशिक्षण एआइ, ड्रोन, साइबर, रोबोटिक, सिमुलेटर इन सब बेसिक लेवल से ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि मल्टी डोमेन ऑपरेशन या बहु क्षेत्रीय लड़ाई होगी, उसमें ये काम आयेंगे.

इंफैंट्री आदि को छोड़कर सभी विंग में महिला कैडेट्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है. कमांडेंट संदीप सिंह ने बताया कि फिलहाल 350 पुरुष व 30 महिला को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था है.

आर्मी हेड क्वार्टर से जिस तरह गया ओटीए को देखा जा रहा है, उससे उम्मीद है कि इसकी क्षमता और बढ़ायी जायेगी. चूंकि गया में तकनीकी व चेन्नई में नन तकनीकी शॉर्ट सर्विस कमीशन को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था है.

साइबर सुरक्षा में सेना की तैयारी और ओटीए की क्षमता में विस्तार

साइबर आज की तारीख में एक ऐसा हथियार है, जो बिना बम को इस्तेमाल किये सटीक जगह अपना तीर छोड़ जाता है. सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि आर्मी में नेशनल लेवल से लेकर अलग-अलग सेल में साइबर एक्सपर्ट व वर्टिकल हैं. साइबर के मुहिम में उसे नाकाम करने को हमारी सेना पूरी तरह तैयार है.

हम दुश्मन के नापाक इरादे को कहीं भी टिकने नहीं देंगे, इतने प्रशिक्षित कर रहे हैं और भी नये तकनीक को इजाद किया जा रहा है. साइबर, एआइ, रोबोटिक्स को अपने प्रशिक्षण के सिलेबस में शामिल कर रहे हैं, जैसे ये सिग्नल्स में एंटी साइबर, इलेक्ट्रॉनिक्स वारफेयर में पूरी तरह सक्षम हैं.

कमांडेंट ने कहा कि आर्मी पुरुष-महिला में कोई फर्क नहीं मानती, केवल शारीरिक मापदंड में थोड़ा फर्क है, जो प्राकृतिक है. जो आर्मी के मर्म से बाहर हैं, उन्हें इसमें शामिल होना चाहिए, ताकि देश की सेवा के काम आयें. 2011 से अब तक 26 वर्षों में ओटीए के रोल व मेंडेट में काफी बदलाव आया है. 2024 से ओटीए गया व ओटीए चेन्नई 750-750 को प्रशिक्षण देते हैं. पहले हम 100 से 400 हुए, फिर 488 से अब 750 तक पहुंचे हैं.

यह अपग्रेडेशन हुआ है, न सिर्फ ट्रेनिंग देने बल्कि साधन-संसाधन में भी. यहां जो अफसर व ट्रेनी आ रहे हैं, वे टेक्निकल ट्रेंड आ रहे हैं. कंप्यूटर साइंस, कम्युनिकेशन व इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक के हैं. उनकी एआइ की जानकारी का स्तर काफी ऊंचा है और एंटी एआइ की पूरी जानकारी उन्हें दी जा रही है.

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By कंचन सिन्हा

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