गया जी: डोभी में निलांजन नदी में डूबने से 54 वर्षीय कुशल राजमिस्त्री की मौत, परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे सुरेश दास

गया के डोभी में काम से लौट रहे 54 वर्षीय कुशल राजमिस्त्री सुरेश दास की निलांजन नदी में डूबने से मौत हो गई. पैर फिसलने के कारण वे गहरे पानी में समा गए.

Gaya Ji News: डोभी थाना क्षेत्र अंतर्गत घटेरिया गांव के समीप बुधवार को एक हृदयविदारक हादसे में 54 वर्षीय कुशल राजमिस्त्री सुरेश दास की निलांजन नदी में डूबने से असामयिक मौत हो गई. घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और पूरे घटेरिया गांव में गहरा शोक व्याप्त है. नदी की तेज धारा और गहरे पानी में समा जाने के कारण यह दर्दनाक हादसा पेश आया.

काम निपटाकर घर लौटते समय फिसला पैर

ग्रामीणों और पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेश दास अपने दो अन्य मजदूर साथियों के साथ मजदूरी और निर्माण कार्य के सिलसिले में भुरकुंडा गांव गए हुए थे. वहां मजदूरों से काम के संबंध में बातचीत पूरी करने के बाद वे दोनों साथियों के साथ पैदल ही नदी के रास्ते अपने घर घटेरिया लौट रहे थे. जैसे ही वे घटेरिया के नजदीक निलांजन नदी पार करने लगे, अचानक उनका पैर फिसल गया. तेज बहाव और नदी तल में बने गहरे गड्ढे के कारण वे संभल नहीं सके और सीधे गहरे पानी में चले गए.

ग्रामीणों व तैराकों के प्रयास के बावजूद नहीं बच सकी जान

साथ चल रहे दोनों साथियों ने जैसे ही सुरेश को तेज धार में बहते और डूबते देखा, उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू किया. चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण और स्थानीय तैराक बिना समय गंवाए नदी में कूद पड़े. तैराकों ने उन्हें बचाने के लिए काफी खोजबीन और मशक्कत की, लेकिन तब तक वे गहरे जल में पूरी तरह डूब चुके थे. काफी प्रयासों के बाद अंततः उनके पार्थिव शरीर को नदी से बाहर निकाला जा सका.

मगध मेडिकल कॉलेज भेजा गया शव, कानूनी प्रक्रिया जारी

हादसे की सूचना मिलते ही डोभी थाने की पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, गया भेज दिया. डोभी थाना पुलिस ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है.

परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे सुरेश दास

मृतक सुरेश दास अपने पूरे परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे. उनकी अचानक मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सुरेश दास क्षेत्र के बेहद हुनरमंद और कुशल राजमिस्त्री के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने बिना किसी आधुनिक इंजीनियरिंग डिग्री के केवल अपने लंबे अनुभव के दम पर इलाके में कई सुंदर व मजबूत भवनों का निर्माण कराया था. उनके निधन से न केवल परिजनों बल्कि पूरे क्षेत्र के मजदूरों और ग्रामीणों में मायूसी छाई हुई है.

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By Omkar sinha dobhi

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