Mahabodhi Temple : अपने पितरों की आत्मा को मोक्ष दिलाने की कामना के साथ पितृपक्ष मेले में आने वाले देश-विदेश के पिंडदानियों के स्वागत को महाबोधि मंदिर पूरी तरह तैयार है, और गया जी स्थित विष्णुपद मंदिर परिसर व अन्य पिंडवेदियों के साथ ही बोधगया स्थित धर्मारण्य, मतंगवापी, सरस्वती में भी पिंडदान व तर्पण का विधान है.
महाबोधि मंदिर परिसर में पिंडदान की व्यवस्था
पिंडदानी तथागत बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि मंदिर परिसर में भी पिंडदान करते हैं और इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से मंदिर परिसर स्थित मुचलिंद सरोवर क्षेत्र में पिंडदान व कर्मकांड के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराया जाता है, तथा पिंडदानियों की संख्या बढ़ने पर मंदिर परिसर स्थित चबूतरों पर भी पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है.
बोधिवृक्ष का दर्शन और श्रद्धालुओं की भीड़
पिंडदानी यहां अगर पिंडदान नहीं भी करते हैं, तब भी वे तथागत बुद्ध का दर्शन व पवित्र बोधिवृक्ष को नमन कर अपने पितरों की आत्मा की शांति की कामना करते हैं, और पितृपक्ष के दौरान महाबोधि मंदिर में पिंडदानियों व श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है तथा 15 दिनों में उनकी संख्या लगभग एक लाख तक पहुंच जाती है.
साफ-सफाई और पेयजल की अनवरत आपूर्ति
ऐसी स्थिति को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से पिंडदान वाले क्षेत्रों में हर वक्त साफ-सफाई व पानी की आपूर्ति अनवरत बहाल रखी जाती है, जिसकी पूरी तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है.
सुरक्षा को लेकर विशेष चौकसी और जवानों की तैनाती
महाबोधि मंदिर की सुरक्षा को लेकर हर वक्त चौकसी बरती जाती है, और सुरक्षा प्रभारी इंस्पेक्टर इंद्रजीत कुमार ने बताया कि मंदिर में प्रवेश से पहले लगेज स्कैनरों व मेटल डिटेक्टरों से जांच होती है तथा 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, और फिलहाल लगभग 300 हथियारबंद जवानों की तैनाती की गई है जो पितृपक्ष मेले को लेकर सुरक्षा और जांच में और अधिक चौकसी बरतेंगे.
