बिहार PDS में बड़ा घोटाला! 15 किमी दूर बैठी बच्ची ने ‘लगाया अंगूठा’, राशन हो गया गायब, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

गया जिले में पीडीएस सिस्टम में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. फतेहपुर की 10 साल की बच्ची के नाम पर मोहनपुर में बायोमेट्रिक सत्यापन दिखाकर राशन निकासी कर ली गई, जबकि बच्ची कभी वहां गई ही नहीं. मामले ने राशन वितरण व्यवस्था और तकनीकी सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

Gaya PDS News: (फतेहपुर से अरविंद कुमार सिंह ) बिहार की जन वितरण प्रणाली (PDS) में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और तकनीकी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला गया जिले के मोहनपुर और फतेहपुर प्रखंड का है, जहां 10 साल की बच्ची के नाम पर 15 किलोमीटर दूर राशन निकासी दिखा दी गई.

घर में थी बच्ची, मोहनपुर में निकल गया राशन

फतेहपुर प्रखंड के रघवाचक गांव निवासी मुन्नी देवी जब मई महीने का राशन लेने अपने स्थानीय डीलर के पास पहुंचीं, तो उन्हें पता चला कि उनका राशन पहले ही निकाला जा चुका है. इतना ही नहीं, जनवरी महीने में भी इसी तरह राशन निकासी दिखायी गई थी.

10 साल की स्वीटी के नाम पर हुआ बायोमेट्रिक सत्यापन

डीलर से मिले दस्तावेजों के अनुसार मुन्नी देवी की 10 वर्षीय बेटी स्वीटी कुमारी के अंगूठे का सत्यापन कर जनवरी में मोहनपुर के डीलर सुरेंद्र कुमार के पॉस मशीन से राशन निकाला गया. वहीं मई महीने में मोहनपुर की ही दूसरी डीलर ममता कुमारी के यहां से भी उसी बच्ची के नाम पर राशन उठाव दिखाया गया.

बिना बायोमेट्रिक अपडेट कैसे मैच हुआ अंगूठा?

पीड़िता मुन्नी देवी का कहना है कि उनकी बेटी स्वीटी का आधार कार्ड में बायोमेट्रिक अपडेट ही नहीं हुआ है. स्थानीय डीलर के यहां उसका अंगूठा कभी मैच नहीं करता. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोहनपुर की पॉस मशीन ने आखिर उसका अंगूठा सत्यापित कैसे कर लिया.

15 किलोमीटर दूर जाकर बच्ची ने कैसे लगाया अंगूठा?

परिवार का दावा है कि 10 साल की स्वीटी कभी अकेले घर से बाहर नहीं गई. ऐसे में फतेहपुर से 15 किलोमीटर दूर मोहनपुर जाकर दो अलग-अलग डीलरों के यहां अंगूठा लगाने की बात पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है.

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले बेलागंज समेत कई प्रखंडों में बिना अंगूठा लगाए राशन निकासी और मृत कार्डधारियों के नाम पर बायोमेट्रिक सत्यापन के आरोप सामने आ चुके हैं. इससे पूरे पीडीएस सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं.

क्लोन फिंगरप्रिंट और मिलीभगत की आशंका

सूत्रों का दावा है कि तकनीकी खामी के नाम पर डीलरों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है. क्लोन फिंगरप्रिंट यानी नकली अंगूठे या सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर गरीबों के हिस्से का राशन निकाला जा रहा है.

डीएम और खाद्य विभाग से शिकायत करेगी पीड़िता

पीड़ित मुन्नी देवी ने पूरे मामले की लिखित शिकायत गया डीएम और खाद्य आपूर्ति विभाग को देने की तैयारी की है. उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई और अपने हक का राशन दिलाने की मांग की है. इधर फतेहपुर आपूर्ति पदाधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस मामले की जानकारी नहीं है. शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.

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Published by: Sakshi Kumari

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