गया जी नगर निगम में तेल का हेराफेरी उजागर होना बंद नहीं हो रहा है. एक बार फिर निगम के एक अधिकारी के गाड़ी के नाम पर खपत तेल पर सवाल उठने लगे हैं. निगम से मिली जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति ने तेल का घोटाला उजागर होने के बाद आरटीआइ लगाकर स्वच्छता से जुड़े एक अधिकारी का जनवरी से जून तक तेल खर्च का रिकॉर्ड मांग की.
आंकड़ों में बड़ा झोल
तेल प्रभारी सह निगम के सहायक ने पूरी लिस्ट तैयार कर उक्त अधिकारी से दस्तखत कराने पहुंचा, तो अधिकारी ने तेल खर्च का विवरण देख आग-बबूला हो गये. उन्होंने तुरंत ही गाड़ी लॉगबुक मंगवाकर जांच किया, तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया.
कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, लॉगबुक में छह माह में 1566 लीटर डीजल लेने की बात अंकित है, तो तेल प्रभारी के रजिस्टर में 3114 लीटर डीजल लेने की बात लिखी गयी है. तुरंत ही उक्त अधिकारी ने वरीय अधिकारी को इसकी सूचना दे दी है.
छह माह का आंकड़ा
इधर, तेल प्रभारी ने कहा कि उनके हिसाब से गाड़ी में डीजल 3114 लीटर ही छह माह में दिया गया है. लॉगबुक में झांसा में रखकर ड्राइवर ने उनसे भी कम लीटर डीजल की लिस्ट पर दस्तखत करवा लिया है. आरटीआइ में सही आंकड़ा ही देना होगा.
| माह का नाम | गाड़ी के लॉगबुक में डीजल | तेल प्रभारी के रजिस्टर का आंकड़ा |
| जनवरी | 270 लीटर | 690 लीटर |
| फरवरी | 230 लीटर | 600 लीटर |
| मार्च | 210 लीटर | 550 लीटर |
| अप्रैल | 370 लीटर | 550 लीटर |
| मई | 226 लीटर | 361 लीटर |
| जून | 260 लीटर | 348 लीटर |
अधिकारी का बयान
स्वच्छता पदाधिकारी ने बताया कि उनकी गाड़ी में लॉगबुक के अनुसार ही डीजल डालवाया गया है. रजिस्टर में आंकड़ा गलत होने के लिए पूरी तौर से सहायक जिम्मेदार हैं. इस संबंध में वरीय अधिकारी को पूरी बात बता दी गयी है.
