Gaya: अगर ऐसा हुआ तो RJD को समर्थन देंगे प्रशांत किशोर, पीके ने लालू के सामने रखी ये शर्त

Gaya: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने राजद सुप्रीमो लालू यादव को चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अगर आप काबिल आदमी को नेता बनोगे तो हम आपका समर्थन करेंगे.

Gaya: बिहार में चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासत चरम पर है. सभी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. सभी गंठबंधन और पार्टी बेलागंज, इमामगंज, तरारी और रामगढ़ की सीटों पर अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. पहली बार चुनाव में उतरे प्रशांत किशोर ने भी अपने उम्मीदवारों से समर्थन में प्रचार अभियान तेज कर दिया है. इसी बीच जन सुराज के सूत्रधार पीके ने बिहार के पूर्व सीएम और राजद सुप्रीमो लालू यादव को चुनौती दी है. उन्होंने ने कहा कि जन सुराज राजद को समर्थन देने को तैयार है, लेकिन एक शर्त पर.

क्या है शर्त

प्रशांत किशोर गया के बेलागंज विधानसभा क्षेत्र में अपने उम्मीदवार मोहम्मद अमजद के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे. इसी दौरान उन्होंने कहा कि लालू यादव समाज के किसी काबिल आदमी को राजद का नेता बनायेंगे तो जन सुराज की टीम उनके समर्थन में आ जाएगी. पीके ने यह भी कहा कि अगर ऐसा हुआ तो हम भी राजद का झंडा लेकर पीछे चलने लगेंगे. पीके ने आगे कहा, “लेकिन लालू ऐसा कभी नहीं करेंगे क्योंकि उन्होंने कभी अपनी जाति की राजनीति नहीं की है. लालू जी सिर्फ अपने परिवार और अपने बच्चों की राजनीति करते हैं.”

बताया अपना संकल्प

प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी के तीन बड़े संकल्पों के बारे में जनता को बताते हुए कहा कि 2025 में जब जन सुराज की व्यवस्था आएगी तो 60 साल से ज्यादा उम्र के प्रत्येक लोगों को हर महीने 2,000 रुपये पेंशन मिलेगी. उन्होंने महंगाई के इस दौर में सिर्फ 400 रुपये पेंशन देने को लेकर बिहार सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि 2025 छठ के बाद बिहार के युवाओं के लिए बिहार में ही रोजगार की व्यवस्था की जाएगी.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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