जदयू के वरिष्ठ नेता और संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय झा ने गया-बोधगया में पर्यटन विकास से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की. विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने फल्गु नदी, रबर डैम और प्रस्तावित गया-बोधगया कॉरिडोर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने कहा कि विष्णुपद मंदिर हो या बोधगया कॉरिडोर, दोनों का अस्तित्व फल्गु नदी से जुड़ा है.
Gaya-Bodhgaya Corridor के लिए फल्गु में पानी जरूरी
संजय झा ने कहा कि गया और बोधगया में सालभर देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. गया में पिंडदान और बोधगया में बौद्ध श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है. ऐसे में फल्गु नदी में सालभर स्वच्छ और पर्याप्त पानी का प्रवाह बना रहना जरूरी है. उन्होंने बताया कि फल्गु नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सोन नदी से पानी लाने के विकल्प पर काम किया जा रहा है.
सोन नदी का पानी लाने की तैयारी
संजय झा ने कहा कि फल्गु नदी को सोन नदी से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है. इसका उद्देश्य फल्गु में स्थायी जल प्रवाह बनाए रखना है. उन्होंने कहा कि गया-बोधगया के पर्यटन विकास के लिए यह योजना काफी महत्वपूर्ण है और इसे पूरा करने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं.
रबर डैम से फल्गु में बना रहता है पानी
संसदीय समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ गया पहुंचे संजय झा ने मंगलवार सुबह विष्णुपद मंदिर में करीब 15 मिनट तक पूजा-अर्चना की. इसके बाद उन्होंने देवघाट और फल्गु नदी पर बने रबर डैम का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सरकार की ओर से बनाए गए रबर डैम के कारण फल्गु नदी में पानी उपलब्ध रहता है.
1200 करोड़ के Gaya-Bodhgaya Corridor की तैयारी
संजय झा ने बताया कि केंद्रीय बजट में गया और बोधगया के लिए करीब 1200 करोड़ रुपये के कॉरिडोर की घोषणा की गयी है. इस महत्वाकांक्षी योजना की डीपीआर जमा हो चुकी है. दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और बिहार के नेताओं के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कॉरिडोर की रूपरेखा पर चर्चा भी की जा चुकी है.
फल्गु नदी से जुड़ा है कॉरिडोर का भविष्य
संजय झा ने कहा कि विष्णुपद मंदिर और गया-बोधगया कॉरिडोर दोनों की सुंदरता और महत्व फल्गु नदी से जुड़ा है. कॉरिडोर को आकर्षक बनाने के लिए नदी में सालभर पानी का प्रवाह जरूरी है. इसी को देखते हुए सोन नदी का पानी फल्गु तक पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है.
गंगा जल समझौते की समीक्षा की मांग
संजय झा ने 1996 के भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते की समीक्षा की भी मांग की. उन्होंने कहा कि यह समझौता 30 वर्षों के लिए हुआ था और इसकी अवधि आगामी 12 दिसंबर को समाप्त हो रही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा समझौते का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए. यदि नया राजनयिक समझौता होता है तो उसमें बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.
बिहार में बढ़ी पानी की जरूरत
संजय झा ने कहा कि 1996 में बिहार की आबादी करीब सवा सात करोड़ थी, जो अब बढ़कर 13 करोड़ से अधिक हो चुकी है. आबादी बढ़ने के साथ सिंचाई, उद्योग और पेयजल के लिए पानी की जरूरत भी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि बिहार के सामने से गंगा नदी बहती है, लेकिन राज्य को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है.
गया-बोधगया बनेगा बड़ा पर्यटन केंद्र
संजय झा ने दावा किया कि गया-बोधगया कॉरिडोर और पर्यटन से जुड़ी योजनाएं पूरी होने के बाद पूरे क्षेत्र का स्वरूप बदल जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गया-बोधगया देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है. करीब 15 वर्ष पहले कम लोग गया-बोधगया की पर्यटन क्षमता को जानते थे, लेकिन अब इसकी संभावनाएं देश और दुनिया के सामने हैं.
