बंद पड़े लिक्विड नाइट्रोजन प्लांट को शुरू कराने की कवायद

वर्षों से बंद पड़े लिक्विड नाइट्रोजन प्लांट को चालू कराने की कवायद कृषि मंत्री ने की है. हालांकि, मंत्री द्वारा की गयी पहल प्रथम चरण की कार्रवाई के तहत ही है, पर मगध क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए सराहनीय है.

गया : वर्षों से बंद पड़े लिक्विड नाइट्रोजन प्लांट को चालू कराने की कवायद कृषि मंत्री ने की है. हालांकि, मंत्री द्वारा की गयी पहल प्रथम चरण की कार्रवाई के तहत ही है, पर मगध क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए सराहनीय है. मंत्री ने सोमवार की शाम न केवल उस प्लांट का बारीकी से निरीक्षण किया, बल्कि उसे शुरू कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई भी शुरू कर दी है. उन्होंने प्लांट से जुड़े इंजीनियर से संपर्क कर बेसिक जानकारी मांगी और प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये.गौरतलब है कि लिक्विड नाइट्रोजन प्लांट में कृत्रिम गर्भाधान के लिए मवेशी रखे जाते हैं. शहर के नाजरथ एकेडमी रोड स्थित पशुपालन विभाग के परिसर में इस तरह के प्लांट की सुविधा 80सी के दशक में शुरू की गयी थी.

इस प्लांट में करीब -190 डिग्री ठंड बनाये रखने की क्षमता थी. यह प्लांट इंग्लैंड की किसी कंपनी ने डीआरडीए की देखरेख में 1987 में शुरू की थी. कुछ वर्षों तक चलने के बाद वर्ष 1994 में यह प्लांट किसी वजह से बंद हो गया. तब से लेकर अब तक यह प्लांट बंद ही पड़ा है. इस पर अब जाकर कृषि मंत्री की नजर-ए-इनायत हुई है. उस प्लांट को पुन: चालू कराने की कोशिश मंत्री द्वारा शुरू कर दी गयी है.

आत्मा परियोजना के सहायक निदेशक नीरज वर्मा ने बताया कि मंत्री ने पूरे प्लांट का निरीक्षण किया. इसके बाद उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर प्लांट को शुरू कराने का खाका तैयार करने को कहा. उन्होंने बताया कि मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि इस प्लांट को हर हाल में शुरू कराया जायेगा, ताकि पशुपालकों को गुणवत्ता वाले ब्रीड कृत्रिम गर्भाधान आसानी मिल सके. और देसी गाय के नस्लों को बचाया जा सके.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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