गया जी : टिकारी में 50 एकड़ में डीएसआर से धान की खेती, कम लागत में पानी और समय की भी बचत

गया जी के टिकारी में डीएसआर तकनीक से धान उत्पादन पर जोर दिया गया, जिसमें 50 एकड़ की फसल का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया. इस विधि से खेती की लागत, समय और पानी की बचत होती है.

Gaya Ji News : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर (ICAR-RCER), पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), मानपुर के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को 'धान परती भूमि परियोजना' के तहत धान की सीधी बुआई (DSR) में कीट एवं रोग प्रबंधन विषय पर एक विशेष प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया.

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी सहित कृषि विभाग के कई वरीय पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और आसपास के करीब 100 स्थानीय किसान शामिल हुए.

इस दौरान प्रगतिशील किसान आशीष कुमार सिंह ने जिला कृषि पदाधिकारी को धान की सीधी बुआई (DSR) की पूरी प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने डीएसआर तकनीक से करीब 50 एकड़ में लहलहा रही धान की फसल का खेत में प्रत्यक्ष भ्रमण कराया और वहां मौजूद किसानों को इसके व्यावहारिक फायदों से अवगत कराया.

उन्होंने बताया कि इस आधुनिक तकनीक से धान की खेती में लागत एवं संसाधनों की भारी बचत तो होती ही है, साथ ही समय और पानी की भी बहुत बड़ी बचत होती है.

जिला कृषि पदाधिकारी ने की फसल की सराहना और भ्रमण पर जोर

जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार ने डीएसआर विधि से लगाई गई धान की फसल का बारीकी से निरीक्षण किया और फसल की बेहतरीन स्थिति की जमकर सराहना की. उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जिले के अन्य प्रखंडों के किसानों को भी इस प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया जाना चाहिए, ताकि किसान इस तकनीक को अपनी आँखों से प्रत्यक्ष देखकर इसके वास्तविक लाभों को अच्छी तरह समझ सकें.

वैज्ञानिकों ने दिए कीट एवं रोग प्रबंधन के जरूरी टिप्स

प्रक्षेत्र दिवस के अवसर पर मौजूद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों एवं बीमारियों की पहचान करने, नियमित रूप से फसल की निगरानी रखने तथा समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी.

विषय विशेषज्ञों ने खेतों में ही प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर किसानों को डीएसआर तकनीक, बेहतर फसल प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण के कारगर उपाय समझाए तथा उनकी जिज्ञासाओं एवं सवालों का संतोषजनक समाधान किया.

कार्यक्रम में किसानों को डीएसआर तकनीक और इसके फायदे की जानकारी देते

टिकाऊ और लाभकारी उत्पादन को बढ़ावा देना है मुख्य उद्देश्य

इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य धान परती भूमि का बेहतर और सदुपयोग करना, खेती की लागत में कमी लाना, प्राकृतिक संसाधनों का कुशल उपयोग करना तथा क्षेत्र में टिकाऊ एवं लाभकारी धान उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना था.

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इस कार्यक्रम का मार्गदर्शन आइसीएआर-आरसीइआर, पटना के निदेशक डॉ. अनूप दास द्वारा किया गया, जबकि इसका संपूर्ण आयोजन एवं वित्तीय सहयोग अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के तहत किया गया.

कार्यक्रम के अंत में किसान आशीष कुमार सिंह ने जिला कृषि पदाधिकारी को धान की सीधी बुवाई से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी दी और इससे किसानों को होने वाले आर्थिक फायदों से अवगत कराते हुए 50 एकड़ में फैली फसल का अवलोकन कराया.

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By विजय कुमार पांडेय

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