बिहार के पर्यटन कारोबार के लिए अच्छी खबर, बोधगया में बढ़ी श्रीलंकाई श्रद्धालुओं की आवाजाही

Bodh Gaya Sri Lankan Tourists : तथागत बुद्ध की तपोस्थली ढूंगेश्वरी पहाड़ी पर इन दिनों श्रीलंका के बौद्ध श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी है. गुफा में स्थापित बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन और खूबसूरत वादियों का लुत्फ उठाने आ रहे हैं. इससे बोधगया के पर्यटन कारोबारियों में खुशी की लहर है.

Bodh Gaya Sri Lankan Tourists : तथागत बुद्ध की तपोस्थली ढूंगेश्वरी पहाड़ी स्थित गुफा में स्थापित बुद्ध की प्रतिमा का दर्शन करने व पहाड़ी की खूबसूरत वादियों का अवलोकन करने को लेकर इन दिनों श्रीलंका के बौद्ध श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ गई है, जिससे ढूंगेश्वरी पहाड़ी का पूरा नजारा भी काफी बदला हुआ नजर आ रहा है.

गुफा में पूजा-अर्चना कर अभिभूत हो रहे श्रद्धालु

बोधगया में दर्शन-पूजा के बाद श्रद्धालु बुद्ध की तपोस्थली ढूंगेश्वरी पहाड़ी स्थित गुफा व वहां स्थापित तथागत बुद्ध की कंकाल रूपी मूर्ति के समक्ष पूजा-अर्चना कर पूरी तरह अभिभूत हो रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ज्ञान प्राप्ति से पहले राजकुमार सिद्धार्थ ने यहां छह वर्षों तक कठिन साधना की थी.

ढूंगेश्वरी पहाड़ी पर पहुंचे श्रीलंका के बौद्ध श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network

ढूंगेश्वरी गुफा का बौद्ध इतिहास और पर्यटन सीजन का आगाज

कठिन साधना के बाद उन्होंने मुहाने व निरंजना नदी के किनारे पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान लगाया था और बुद्धत्व की प्राप्ति की थी, जिस कारण बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए ढूंगेश्वरी पहाड़ी स्थित गुफा काफी अहमियत रखती है और यहां अगस्त से श्रीलंका के श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ ही बोधगया के पर्यटन सीजन का आगाज माना जाता है.

पर्यटन कारोबारियों में जगी उम्मीद और कारोबार में तेजी

इस वर्ष श्रीलंका के श्रद्धालुओं की आवाजाही अपेक्षाकृत ज्यादा होने के कारण पर्यटन पर आधारित बोधगया के कारोबारियों को यह उम्मीद जग गई है कि उनकी ठीक-ठाक आमदनी हो पाएगी, जो यहां के आगामी पर्यटन सीजन के लिए भी बेहद अच्छे और सकारात्मक संकेत हैं.

ढूंगेश्वरी पहाड़ी स्थित गुफा में बुद्ध के दर्शन के लिए कतारबद्ध श्रीलंकाई श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network

यातायात और सुविधाओं के बेहतर इंतजाम

ढूंगेश्वरी पहाड़ी तक पहुंचने के लिए बिहार पर्यटन द्वारा रोप-वे का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही यह सुविधा बहाल हो जाएगी, जबकि पहाड़ी स्थित गुफा व अन्य मंदिरों तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा डोला की व्यवस्था की गई है, जिससे शुल्क का भुगतान कर पैदल चलने से असमर्थ बुजुर्ग श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुंच पा रहे हैं.


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By कलेंद्र प्रताप सिंह

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