Bodh Gaya Jagannath Temple : बोधगया स्थित प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर का प्रबंधन अब बोधगया मठ के हाथों में रहेगा. बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद द्वारा जारी आदेश में श्री जगन्नाथ मंदिर को बोधगया मठ का अभिन्न अंग माना गया है.
न्यास पर्षद के आदेश के अनुसार मंदिर की व्यवस्था बोधगया मठ की देखरेख एवं प्रबंधन में रहेगी.
इस संबंध में पर्षद ने श्री जगन्नाथ मंदिर के संदर्भ में कहा है कि जगन्नाथ मंदिर हमेशा से ही बोधगया मठ का अभिन्न अंग रहा है, किंतु कालांतर में मंदिर की स्थिति जर्जर हो जाने के कारण इसके जीर्णोद्धार के लिए श्रीजगन्नाथ जीर्णोद्धार समिति का गठन किया गया था.
जीर्णोद्धार के बाद 11 सदस्यीय न्यास समिति का हुआ था गठन
जीर्णोद्धार का काम पूरा होने के उपरांत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद द्वारा मंदिर की व्यवस्था एवं प्रबंधन के लिए 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन पांच वर्षों के लिए किया गया था. उक्त न्यास समिति का निर्धारित कार्यकाल पूर्ण हो चुका है.
इस कारण न्यास समिति के कार्यकाल की समाप्ति के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने उपलब्ध अभिलेख एवं मंदिर से संबंधित तथ्यों के आधार पर श्रीजगन्नाथ मंदिर की समस्त व्यवस्थाओं का दायित्व बोधगया मठ को सौंप दिया है.
बोधगया मठ के अधीन रहेंगी मंदिर की तमाम व्यवस्थाएं
इसके अंतर्गत मंदिर की परिसंपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन, धार्मिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था तथा दैनिक संचालन से संबंधित जिम्मेदारियां अब बोधगया मठ के अधीन रहेंगी. मंदिर की पूजा पद्धति और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन पूर्ववत बोधगया मठ की देखरेख में किया जायेगा.
बोधगया मठ के महंत त्रिवेणी गिरि ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि श्रीजगन्नाथ मंदिर सदैव से ही बोधगया मठ की धार्मिक परंपरा एवं व्यवस्था का अंग रहा है.
उन्होंने कहा कि बोधगया मठ आगे भी श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपरा व धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप मंदिर का सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से संचालन करता रहेगा.
भूहदबंदी, कानूनी प्रक्रिया और जीर्णोद्धार का इतिहास
उल्लेखनीय है कि बोधगया मठ की परिसंपत्तियों को भूहदबंदी से बचने के लिए मठ द्वारा 17 न्यासों में विभाजित कर दिया गया था, जिसमें श्रीजगन्नाथ मंदिर भी था. न्यास के सृजन के वक्त इसका संचालन बोधगया मठ द्वारा ही किया जाता था.
बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने एक ही न्यास माना व सभी न्यासों को अवैध मानते हुए सभी संपत्ति का मालिक बोधगया मठ को ही माना. इसके विरुद्ध बोधगया मठ ने पहले हाईकोर्ट में अपील की. हाईकोर्ट ने स्थिति को बहाल रखने का आदेश पारित किया.
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इसके बाद बोधगया मठ ने इसको चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट पटना के आदेश को यथावत रखा. इसके बाद श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर 2007 में श्रीजगन्नाथ जीर्णोद्धार समिति का गठन किया गया.
इसके अध्यक्ष गया के डीएम को तथा बोधगया मठ के तत्कालीन महंत सुदर्शन गिरि को सचिव बनाया गया था.
न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन के हस्ताक्षर से जारी हुआ आदेश
बाद में इसके जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण होने पर 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन पांच वर्षों के लिए किया गया था. लेकिन, अब जब कार्यकाल पूरा हो चुका है, तो बोधगया मठ की दावेदारी पर धार्मिक न्यास पर्षद ने प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर को बोधगया मठ की परिसंपत्ति बताते हुए प्रबंध संचालन का कार्य बोधगया मठ को संपूर्ण रूप से प्रदान किया है.
न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन के हस्ताक्षर से 24 अगस्त को यह आदेश जारी हुआ है. इसकी प्रतिलिपि गया जिलाधिकारी सहित अन्य संबंधित को भी भेजी गयी है.
