हर बार सभी जनप्रतिनिधियों को बैठक की सूचना भी दी जाती है़ इसके बावजूद जनप्रतिनिधि खुद कभी बैठकों में भाग नहीं लेते. एक या दो बार उनके माध्यम से नियुक्त प्रतिनिधि भले ही बोर्ड की बैठक में हिस्सा लेते हैं. किसी सांसद या विधान पार्षद ने आज तक नगर निगम के बोर्ड की बैठकों में हिस्सा नहीं लिया है.
निगम की बैठकों में शामिल नहीं होते सांसद व विधायक
गया: नगर निगम की बैठकों में कभी सांसद या विधायक शामिल नहीं होते हैं. जबकि नगरपालिका अधिनियम 2007 के मुताबिक लोकसभा व विधानसभा के वैसे सदस्य, जो उन निर्वाचन क्षेत्रों का पूर्णत: या अंशत: प्रतिनिधित्व करते हैं, वे इस बैठक में भाग लेंगे. इसके अलावा राज्यसभा व विधान परिषद के सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र नगर […]

गया: नगर निगम की बैठकों में कभी सांसद या विधायक शामिल नहीं होते हैं. जबकि नगरपालिका अधिनियम 2007 के मुताबिक लोकसभा व विधानसभा के वैसे सदस्य, जो उन निर्वाचन क्षेत्रों का पूर्णत: या अंशत: प्रतिनिधित्व करते हैं, वे इस बैठक में भाग लेंगे. इसके अलावा राज्यसभा व विधान परिषद के सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र नगर निकाय क्षेत्र में पड़ता हो, वे भी बैठकों में प्रतिनिधित्व करेंगे. नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक बोर्ड की बैठक में अभी तक सिर्फ बेलागंज के विधायक सुरेंद्र यादव दो बार स्वयं मौजूद रहे हैं.
…तो शहर की तसवीर कुछ और अलग होती: पार्षदों का मानना है कि बैठक में प्रतिनिधि न भेज कर अगर जनप्रतिनिधि स्वयं मौजूद रहें, तो शहर के विकास की योजनाओं को निर्धारित करने व विकास को गति देना ज्यादा आसान हो जायेगा. शहर व इसके आसपास के क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई विधायक मंत्रिमंडल में भी रह चुके हैं, बावजूद इसके शहर में कोई आश्चर्यजनक विकास नहीं हो सका. वहीं, लोगों का मानना है कि सांसद व विधायकों ने शहर के विकास को निगम के सहारे छोड़ दिया है. अगर इनकी भी कुछ सहभागिता होती, तो शहर की तसवीर कुछ और अलग होती.