गया: आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए नायक सुनील कुमार विद्यार्थी के बुलंद हौसले की चर्चा हर चौक-चौराहे व गांवों के चौपालों पर हो रही है. ऐसा ही एक चौपाल गुरुवार की दोपहर शहीद सुनील के गांव बोकनारी के पास स्थित हसपुरा रेलवे गुमटी के पास लगा था. एक पेड़ की छांव में बैठे रेलवे गैंगमैन से रिटायर्ड 72 वर्षीय महावीर यादव कहते हैं कि उनका बेटा देवानंद यादव आर्मी में है. मेरठ में पोस्टेड है. लेकिन, जिस दिन से आर्मी ज्वाइंन की, वह मेरा बेटा नहीं रहा. वह देश का बेटा हो गया. तनिक भी फिक्र नहीं होती है कि मेरा बेटा शहीद हो जायेगा. देश का बेटा है, देश के लिए शहीद हो जायेगा तो इससे और गौरव की बात क्या होगी.
श्री यादव बताते हैं कि उनकी बहू शारदा देवी (देवानंद की पत्नी) को कभी भी यह गम नहीं होता है कि उनके पति शहीद हो जायेंगे. दूसरे बेटे रामदयाल यादव को भी आर्मी में भेजना चाहता था, लेकिन भ्रष्टाचार के भंवर में फंस गया. आर्मी के ऑफिसरों से सांठ-गांठ रखनेवाले दलालों ने उनके बेटे से पांच लाख घूस मांगी थी. आर्मी में भरती होने के लिए पांच लाख घूस देना उन्हें उचित नहीं लगा. यह काम उनके जमीर के खिलाफ था. न घूस दिया और न ही बेटा आर्मी में बहाल हो सका. व्यवस्था में सुधार की जरूरत है.
आर्मी बहाली में घूसखोरी को रोकें पीएम
श्री यादव बताते हैं कि जवानों की शहादत पर पूरा देश मर्माहत है. लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्मी बहाली में घूसखोरी को बंद कराने के लिए भी ठोस कदम उठाएं. यह कलंक की बात है कि हमारा बेटा आर्मी में बहाल होकर देश के लिए शहीद होना चाहता है और उससे पांच लाख रुपये घूस मांगी जाती है. सुनील उनके गांव-ज्वार का बेटा था. उसको श्रद्धांजलि तभी होगी, जब प्रधानमंत्री एलान करें कि आर्मी बहाली में अब किसी बेटे को घूस नहीं देनी पड़ेगी. आर्मी बहाली की प्रक्रिया को और सरल करें, ताकि बहाली के नाम पर दलालों की चांदी न कट सके. पूरी जिंदगी इस बात का ममाल रहेगा कि घूसखोरी के कारण बेटा आर्मी में बहाल नहीं हो सका. बेटा घर में मरेगा तो उसे कौन जानेगा. अगर वह देश के लिए मरता तो पूरा देश उसे जानता. उसका जीता-जागता उदाहरण सुनील है. आज वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी गौरव-गाथा से आनेवाली पीढ़ियां प्रभावित होंगी.
