पंचायत चुनाव से पहले की है योजना
नगर निगम चुनाव की आहट पर तेज हुई चर्चा
कंचन
गया : जिले के साधन संपन्न पंचायतों को अपग्रेड कर नगर निगम या नगर पंचायत से जोड़ने की योजना वांछित रिपोर्ट में ढील की वजह से पूरी नहीं हो पायी. यह योजना पंचायत चुनाव से पहले की थी. अब, जब नगर निगम चुनाव की आहट सुनायी पड़ी है, तो इसकी चर्चा एक बार फिर शुरू हो गयी है. उम्मीद है कि नगर निकाय चुनाव से पहले इस रिपोर्ट के आधार पर शहर के आसपास की पंचायतों को निगम से जुड़ने का लाभ मिल सके और वे नगरीय सुविधाओं से जुड़ सकें.
अनुमंडल व प्रखंड के अधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है कि पंचायतों की स्थिति की पूरी जानकारी दें. इसके लिए एक फॉर्मेट भी तैयार किया गया है, जिसे भर कर जिला पंचायती राज कार्यालय में जमा करना है. उक्त फॉर्मेट में ग्राम पंचायतों के नाम, जनसंख्या (12,000 से अधिक, 40,000 से कम), गैर कृषि कामकाज से जुड़ी आबादी का प्रतिशत, आर्थिक व पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र का महत्व, बाजार की स्थिति, औद्योगिकीकरण की स्थिति व गैर कृषि कार्यों पर निर्भरता 75 प्रतिशत से कम न हाे आदि बातों की जानकारी देनी है. फॉर्मेट पर अंचल अधिकारी, बीडीआे व एसडीआे के संयुक्त हस्ताक्षर होंगे.
जिले के सभी 24 प्रखंडाें में 20 अगस्त, 2016 तक मात्र नाै प्रखंडों से इस तरह की सूचना मिली है, जिनमें मानपुर, बेलागंज, आमस, डुमरिया, माेहनपुर, नीमचक बथानी, माेहड़ा, अतरी व खिजरसराय शामिल हैं. गाैरतलब है कि जिले के सभी 24 प्रखंडों में कुल 332 पंचायतें हैं. वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिले की 332 पंचायतों में 118 पंचायतों की आबादी 12,000 से अधिक है. इसके अलावा अन्य प्रखंडों से ऐसी रिपोर्ट नहीं मिली है.
उल्लेखनीय है कि नगर विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव अमृतलाल मीणा द्वारा सूबे के सभी जिलाधिकारियाें काे चार जनवरी, 2016 को पत्र भेज कर यह निर्देश दिया गया था कि 15 दिनों के अंदर सूचना उपलब्ध करायी जाये, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को नगर पंचायत के रूप में पंचायत चुनाव से पहले अधिसूचित किया जा सके, पर ऐसा नहीं हुआ.
बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के अनुसार, नगरपालिका क्षेत्र गठित करने के लिए शर्तों के अनुसार, जनसंख्या के आधार पर क्षेत्र को तीन भागों में बांटा गया है. पहला, अंतवर्ती यानी छोटे शहर, जिसकी कम से कम आबादी 12,000 व अधिक से अधिक आबादी 40,000 हाे. दूसरा, मध्यम शहरी क्षेत्र, इसमें 40,000 या उससे अधिक परंतु दाे लाख से अधिक की आबादी न हाे और तीसरा वृहत्तर शहरी क्षेत्र, जिसकी आबादी दाे लाख या उससे अधिक हाे.
साथ ही, वहां बसी आबादी के लिए बाजार हाे. 75 प्रतिशत से अधिक आबादी की निर्भरता गैर कृषि कार्य पर न हाे. आर्थिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्ता, कुटीर, लघु या कोई वृहद उद्याेग हाे, जिस पर लोगों की निर्भरता हाे.
महत्वपूर्ण यह भी है कि 12,000 से अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों में जब तक जरूरत के हिसाब से उक्त आवश्यक तथ्य शामिल नहीं होंगे, उन्हें अपग्रेड नहीं किया जा सकता. अब रिपोर्ट का ही इंतजार है. इसके बाद ही पता चल पायेगा कि काैन सी पंचायत उपरोक्त मानक पर खड़ी उतरती है.
