वक्ताओं ने कहा कि बोधगया में मठ की जमीन को लेकर स्थानीय रामदेव पांचू व जानकी मांझी को अपनी जान तक गंवानी पड़ी. इसके बाद सरकार के प्रयास से भूमिहीनों को परचा के माध्यम से जमीन उपलब्ध करायी गयी, पर दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि ज्यादातर जमीनों पर अब तक वास्तविक लाभुकों का कब्जा तक नहीं हो पाया है. इतना ही नहीं, कुछ लाभुकों द्वारा जमीन की गलत तरीके से लीज या बिक्री भी कर दी गयी है.
इसमें यह कहा गया है कि जिसे जमीन का परचा मिला है, उसे जमीन पर कब्जा दिलाया जाये. परचाधारियों को दाखिल-खारिज किया जाये व वासभूमि का परचा दिया जाये. जिन्हें परचा नहीं मिला है, उन्हें जमीन खरीद कर दी जाये. यह भी कि जिन्होंने जमीन को बंधक या लीज पर दे रखा है, उस पर वाद दायर करते हुए कार्रवाई की जाये. संगोष्ठी के दौरान ही चेरकी से आयी एक महिला ने बताया कि उसके गांव के आहर के पिंड पर दूसरे गांव के लोग आकर बस चुके हैं, लेकिन उसे उक्त जमीन पर नहीं बसने दिया जा रहा है.
विचार गोष्ठी को जगदेव सिंह, गांधी निधि पटना के मंत्री विनोद रंजन, के जगत भूषण, अरुण दास, अंजलि, जयकिशन, विशुनधारी, टी उपेंद्र, लालदेव, गुप्तेश्वर, आनंद कुमार, रामदेव प्रसाद, रमेश कुमार, फादर जोश व अन्य ने संबोधित किया. धन्यवाद ज्ञापन बनारसी दास व अध्यक्षता जानकी दास ने की. इससे पहले शाक्यमुनि कॉलेज के पास से रामदेव पांचू व जानकी मांझी के 36वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कर पैदल मार्च करते हुए लोग बिरला धर्मशाला तक पहुंचे.
