इंटरमीडिएट में एडमिशन के लिए भटक रहे विद्यार्थी

गया: मगध विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त शहर के किसी भी कॉलेज के इंटर में अब एडमिशन होने की संभावना नहीं है़ अब भी काफी स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए इस कॉलेज से उस कॉलेज भटक रहे हैं, पर उनको कहीं ठौर नहीं मिल पा रहा है़ वे हताश व निराश हैं. चाहकर भी कॉलेज प्रबंधन उनका […]

गया: मगध विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त शहर के किसी भी कॉलेज के इंटर में अब एडमिशन होने की संभावना नहीं है़ अब भी काफी स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए इस कॉलेज से उस कॉलेज भटक रहे हैं, पर उनको कहीं ठौर नहीं मिल पा रहा है़ वे हताश व निराश हैं. चाहकर भी कॉलेज प्रबंधन उनका एडमिशन नहीं ले पा रहा है. वजह सभी कॉलेज में सीटों का फुल होना है. ऐसे में न केवल छात्र बल्कि अभिभावक भी परेशान हैं. खासकर लड़कियां खासा परेशान हैं.
बीते महीने इंटर में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी. सभी काॅलेज ने अपने अनुकूल साइंस व काॅमर्स में मेरिट लिस्ट के तहत नामांकन लिये थे. इसके अलावा आर्ट्स में डायरेक्ट एडमिशन लिया गया था. लिस्ट में आने वाले विद्यार्थियों से कॉलेज में मौजूद सीटें फूल हो गयीं.
सीटें फूल होते ही सभी कॉलेज प्रशासन ने एडमिशन लेने से हाथ खड़ा कर दिया. कॉलेज के इस जवाब से छात्र, इस कॉलेज से उस कॉलेज की दौड़ लगाने लगे, लेकिन उन्हें हर जगह निराशा ही हाथ लगी़ खासकर लड़कियां अपने एडमिशन को लेकर चिंतित हैं. अब आलम यह है कि कॉलेज प्रशासन चाह कर भी उनका नामांकन नहीं ले पा रहा है. शहर के गया कॉलेज गया, मिर्जा गालिब, अनुग्रह कॉलेज, जगजीवन कॉलेज व गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में अधिक भीड़ थी़ .
गया कॉलेज में स्टूडेंट्स की अधिक भीड़
दरअसल छात्र-छात्राएं सबसे पहले गया कॉलेज में ही एडमिशन के लिए हाथ पैर मारते हैं. प्रत्येक वर्ष सभी कॉलेज प्रशासन एडमिशन फुल होने के बाद काउंसिल से सीट बढ़ाये जाने की मांग करते थे. सीट बढ़ाये जाने की काउंसिल की ओर से अनुमति मिलने के बाद एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर देते थे. लेकिन इस वर्ष किसी भी कॉलेज को अब तक सीट बढ़ाये जाने की अनुमति नहीं मिली है, जिसकी वजह से कोई भी कॉलेज एडमिशन लेने सक्षम नहीं है.
चाह कर भी नहीं ले पा रहे एडमिशन
जगजीवन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुनील सिंह सुमन का कहना है कि विद्यार्थी रोज परेशान हो रहे हैं. वे चाह कर भी एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं. हाथ बंधे हैं. काउंसिल से सीट बढ़ाने की मांग की गयी है. उसके लिए पैसा भी भेजा गया है, पर अब तक कोई संकेत नहीं मिला है. ऐसा ही कुछ अन्य कॉलेज के प्रिंसिपल का भी कहना है.

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